जिले में पंचायती राज चुनाव के पहले चरण की मतगणना पूरी हो चुकी है, जिसमें चार पंचायत समितियों और 7 जिला परिषद सदस्यों के चुनाव संपन्न हुए हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक दलों द्वारा उम्मीदवारों की बाड़ेबंदी (हॉर्स ट्रेडिंग रोकने के लिए रिसॉर्ट या गुप्त स्थान पर ठहराना) किए जाने की अटकलें थीं लेकिन इस बार की चुनावी प्रक्रिया का पूरा गणित लंबा खिंच गया है। बीच में दीपावली का त्योहार आ रहा है और मतगणना 20 नवंबर को होगी। इसके बाद 25 नवंबर को जिला प्रमुख, 26 को उप जिला प्रमुख, 27 को प्रधान और 28 को उपप्रधान का चुनाव होगा। अभी अक्टूबर का महीना ही बीता है, ऐसे में यदि अभी से बाड़ेबंदी शुरू कर दी जाती है तो पूरे एक महीने का भारी-भरकम खर्च कौन उठाएगा? स्थिति यह है कि दोनों ही प्रमुख दलों,कांग्रेस और भाजपा ने अब तक न तो जिला प्रमुख और न ही प्रधान पद के लिए अपने आधिकारिक उम्मीदवारों की घोषणा की है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि लाखों रुपये के इस लंबे खर्चे का भार कौन सहन करेगा। सूत्रों के अनुसार, जिला परिषद के जिन 7 सदस्यों का चुनाव हुआ है उनमें कांग्रेस की ओर से पूर्व मंत्री गोविंद राम मेघवाल के गुट के पांच और दो सदस्य दूसरे गुट के हैं। इसी तरह भाजपा में भी डॉ. विश्वनाथ मेघवाल और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के गुट के सदस्य हैं। दोनों ही दलों में जिला प्रमुख पद का कोई खुला चेहरा या उम्मीदवार सामने नहीं है जो अकेले बाड़ेबंदी का खर्च उठा सके। इसके अलावा, भाजपा का मनोबल भी फिलहाल कांग्रेस की तुलना में कमजोर आंका जा रहा है। विधायक, जिला प्रमुख और प्रधान उम्मीदवार उठाएंगे खर्च राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कांग्रेस अभी बाड़ेबंदी से बच रही है क्योंकि पहले चरण में पूगल और खाजूवाला पंचायत समिति क्षेत्र में ज्यादातर टिकट गोविंद राम मेघवाल के कोटे से दिए गए थे और जिला परिषद सदस्य भी उन्हीं के हैं। ऐसे में शुरुआती जिम्मेदारी उन्हीं के स्तर पर है। यही वजह है कि पार्टी दिवाली के बाद और अगले कुछ चरणों के बीतने के बाद ही बाड़ेबंदी का ठोस कदम उठाने की प्लानिंग कर रही है। इधर भाजपा ने अपने सभी उम्मीदवारों को सतर्क रहने और 24 घंटे पहले मिलने वाले कॉल पर तुरंत रवाना होने के लिए तैयार रहने को कहा है। भाजपा भी दिवाली के आसपास ही बाड़ेबंदी की रूपरेखा तैयार कर रही है। सबसे बड़ा संकट होटलों में रखने, खाने-पीने और लाने-ले जाने के भारी-भरकम खर्च का है। सूत्र बताते हैं कि जिला ​परिषद में जो जिला प्रमुख पद का उम्मीदवार होगा उस पर वित्तीय भार डाला जाएगा। इसी तरह पंचायत समितियों में जो प्रधान पद हासिल करेगा, पंचाय​त समितियों के प्र​ि​तनिधियों का खर्च उसके हिस्से जाएगा। मेरे जो भी उम्मीदवार हैं, वे समझदार हैं, उन्हें कोई बरगला नहीं सकता। फिर भी हम दीपावली के बाद एक ट्रेनिंग सेशन रखने का विचार कर रहे हैं। पर कांग्रेस पर लोगों को भरोसा है। -विशनाराम सियाग, देहात कांग्रेस अध्यक्ष प्रशिक्षण शिविर का प्लान कर रहे हैं। आने वाले समय में इसकी रूपरेखा तय होगी। उम्मीदवारों को सचेत कर दिया गया कि कभी भी कॉल आ सकती है। अपनी तैयारी के साथ रहें। -श्याम पंचारिया, देहात भाजपा अध्यक्ष