केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (एआईएसएचई 2023-24) की रिपोर्ट के आंकड़े राजस्थान की उच्च शिक्षा की वास्तविक स्थिति को बयां करते हैं। राज्य में उच्च शिक्षा का कुल सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 29.51% है (पुरुष: 28.77%, महिला: 30.31%)। 18 से 23 वर्ष की आयु वर्ग में प्रति लाख आबादी पर कॉलेजों का औसत घनत्व 46.82 है। राज्य में कुल 27,37,725 छात्र नामांकित हैं, जबकि कॉलेजों की औसत क्षमता मात्र 451.75 छात्र है। उदयपुर संभाग के प्रमुख कॉलेजों में इस क्षमता से कई गुना अधिक छात्र पंजीकृत हैं, जिससे कैंपस के संसाधनों पर भारी दबाव है। मेवाड़ और वागड़ अंचल (उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़) में संस्थागत घनत्व बेहद विषम है। शहरी क्षेत्रों में कॉलेजों का जमावड़ा है, जबकि दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में इनकी भारी कमी है। बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जैसे एसटी बहुल जिलों में राज्य का एसटी जीईआर 28.79% (पुरुष: 27.93%, महिला: 30.68%) है, लेकिन वहां नियमित शिक्षकों के पद खाली हैं और लैब्स का अभाव है। प्रदेश की स्थिति: कुल 4,130 महाविद्यालयों में से 3,288 निजी क्षेत्र के रिपोर्ट के आंकड़ों (टेबल 5) के मुताबिक, प्रदेश के कुल 4,130 महाविद्यालयों में से 3,288 कॉलेज निजी क्षेत्र (3,016 अन-एडेड और 272 एडेड) के हैं, जबकि सरकारी कॉलेज मात्र 842 हैं। उदयपुर संभाग के चित्तौड़गढ़, राजसमंद और उदयपुर जिलों में भी यही स्थिति है। राज्य के प्राइवेट कॉलेजों में 18,65,750 छात्र नामांकित हैं, जबकि सरकारी कॉलेजों में केवल 6,32,322 छात्र पढ़ रहे हैं। असर: जनजातीय और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए प्राइवेट कॉलेजों की फीस का बोझ उठाना मुश्किल है। नतीजतन, छात्र सीमित सीटों वाले सरकारी कॉलेजों के चक्कर काटने या कम सुविधाओं वाले संस्थानों में प्रवेश लेने को विवश हैं। संकट: 50 छात्रों पर सिर्फ एक टीचर सुखाड़िया विश्वविद्यालय (सुविवि) में लोक प्रशासन विभागाध्यक्ष डॉ. गिरिराज सिंह चौहान के अनुसार रिपोर्ट की टेबल 25 के तहत प्रदेश में उच्च शिक्षा का समग्र छात्र-शिक्षक अनुपात (पीटीआर) 27.02 और यूनिवर्सिटी परिसरों में 28.40 दर्ज किया गया है। उदयपुर के सुविवि और बांसवाड़ा के गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में स्थायी शिक्षकों के अभाव के चलते कई संकायों में यह अनुपात 45 से 50 छात्रों पर 1 शिक्षक तक पहुंच गया है। प्रदेश में कुल पीएचडी शोधार्थियों की संख्या 19,138 है, लेकिन इसमें उदयपुर संभाग की भागीदारी आबादी के अनुपात में बेहद कम है। प्रॉपर गाइडेंस और आधुनिक लैब्स की कमी से क्षेत्र के युवा रिसर्च और इनोवेशन में पिछड़ रहे हैं।