अजमेर की विशेष पॉक्सो कोर्ट संख्या-1 ने नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने दोषी पर 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। विशेष न्यायाधीश हेमंत सिंह ने 15 जुलाई 2026 को फैसला सुनाते हुए पॉक्सो एक्ट की धारा 5(एल)/6 के तहत आरोपी को दोषी माना। अभियोजन के अनुसार- मामला ब्यावर जिले का है। 23 जुलाई 2024 को पीड़िता के पिता ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि मेरी 17 वर्षीय बेटी घर से लापता हो गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि घटना से कुछ दिन पहले एक आरोपी ने परिवार को धमकी दी थी कि वह हमारी बेटी को उठाकर ले जाएगा। शिकायत के बाद पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर किशोरी की तलाश शुरू की। 3 दिन बाद डिटेन हुई थी किशोरी पुलिस ने 26 जुलाई 2024 को किशोरी को डिटेन किया। पीड़िता ने बयान में बताया कि आरोपी मुझे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। इसके बाद सुनसान स्थान पर ले जाकर मेरे साथ जबरन दुष्कर्म किया। आरोपी ने मुझे किसी को घटना के बारे में बताने पर जान से मारने और बदनाम करने की धमकी भी दी। इसके बाद पुलिस ने पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में आरोप पत्र पेश किया। 14 गवाहों के हुए बयान सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 14 गवाहों के बयान और 37 दस्तावेज साक्ष्य कोर्ट में प्रस्तुत किए। पीड़िता के कोर्ट और बीएनएसएस की धारा 180 व 183 के तहत बयान दर्ज हुए। वहीं FSL रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा में दोषी मानते हुए 20 साल के कठोर कारावास और 20 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक प्रशांत यादव ने पैरवी की।