दिवाली के मौके पर अलवर शहर के दिल कहे जाने वाले होपसर्कस और घंटाघर के आसपास लगने वाली फुटपाथ दुकानों को कंपनी बाग रोड पर शिफ्ट करने के फैसले ने व्यापारियों में उदासी ला दी है। नगर निगम और प्रशासन के इस नवाचार से जहां एक तरफ सड़कों पर जाम और हादसे का खतरा कम हुआ है, वहीं दूसरी तरफ त्यौहार के इस मुख्य सीजन में छोटे-बड़े दुकानदारों की ग्राहकी पर बड़ा असर पड़ा है। दैनिक भास्कर की टीम ने दोनों जगहों के दुकानदारों से बातचीत की, जिसमें मिला-जुला लेकिन चिंताजनक रुख देखने को मिला। अधिकतर व्यापारियों का कहना है कि मुख्य बाजार की रौनक खत्म होने से इस बार बिक्री 50 फीसदी तक घट गई है। पढ़िए-किसने क्या कहा- कंपनी बाग में नहीं जम पा रही ग्राहकी होपसर्कस और घंटाघर से कंपनी बाग रोड भेजे गए रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं का कहना है कि नई जगह पर ग्राहकों की वह चहल-पहल नहीं है, जो मुख्य बाजार में रहती थी। मिट्टी का सामान बेचने वाले चांवडपाड़ी के राजेंद्र ने कहा कि घंटाघर के पास पूरा बाजार होने से लोग खरीदारी के लिए सीधे वहीं आते थे और भीड़ खत्म ही नहीं होती थी। यहां वैसी दुकानदारी नहीं है। माल बच गया तो घर में रखने की भी जगह नहीं है। महिला विक्रेता सावित्री देवी ने कहा कि होपसर्कस पर दिन में ही खरीदारी का दौर शुरू हो जाता था, लेकिन नई जगह पर ग्राहक काफी कम आ रहे हैं। रात के समय थोड़े लोग जुटते हैं, जिससे कुल बिक्री काफी प्रभावित हुई है। चाय विक्रेता मनोज कुमार ने कहा कि पहले रेहड़ी-पटरी वाले और ग्राहक खूब चाय पीते थे। अब मुख्य बाजार से रौनक पूरी तरह खत्म हो गई है। गरीब फुटपाथ वालों को दूसरी जगह भेजकर सही नहीं किया गया। रूट डायवर्ट होने से 50 से 70% तक प्रभावित हुआ व्यापार फुटपाथ की दुकानें हटने से भले ही पक्की दुकानों का मुख्य द्वार साफ दिख रहा हो, लेकिन ग्राहकों की घटती आवाजाही से पक्के व्यापारी भी परेशान हैं। बॉम्बे फैशन के दीपेश मलिक ने कहा कि यातायात के लिहाज से फैसला ठीक है, लेकिन रूट डायवर्ट होने से मुख्य बाजार में आने वाले ग्राहक बंट गए हैं। मंडी में आने वाला ग्राहक अब कंपनी बाग नहीं जा पा रहा है। 70 प्रतिशत तक काम प्रभावित हुआ है। इससे बेहतर होता कि दशहरा मैदान पर अलग से बाजार लगाया जाता। नमकीन विक्रेता जगदीश कुमार ने कहा कि दिवाली पर खास ग्राहक आते थे जो रेहड़ी-पटरियों के साथ-साथ हमारी दुकानों से भी खरीदारी करते थे। इस बार 50 प्रतिशत तक काम कम हो गया है। हालांकि, धीरे-धीरे लोग इस नए बदलाव के प्रति अभ्यस्त होंगे। नवाचार से हादसे का डर हुआ खत्म हालांकि कुछ लोगों ने सुरक्षा और व्यवस्था के नजरिए से इस प्रशासनिक फैसले का खुलकर समर्थन किया है। भूगोर महाराज विवेक प्रधान ने कहा कि यह शहर के हित में एक अच्छी पहल है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के प्रयासों और मेयर के नवाचार से इस बार दोगुना से अधिक दुकानें लग सकी हैं। व्यवस्थित बाजार लगने से हादसे का डर कम हुआ है, पूरे शहर में लाइटिंग अच्छी है और अब देर रात तक दुकानें सुरक्षित चल सकेंगी। गर्ग बुक कंपनी के राजेंद्र गर्ग ने कहा कि पहले भारी भीड़ के कारण ग्राहक बड़ी दुकानों तक पहुँच ही नहीं पाते थे। छोटे दुकानदारों के पीछे हमारी दुकानें छिप जाती थीं। इस बड़े बदलाव और बेहतर सुविधाओं से स्थाई दुकानदारों को सहूलियत मिली है।