भागती-दौड़ती दुनिया में ठहराव, आत्मिक जुड़ाव और निःस्वार्थ प्रेम का अहसास कराती कवयित्री और लेखिका अंशु हर्ष की विशेष काव्य प्रस्तुति ‘प्लेटोनिक लव 2.0’ का आयोजन राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, जयपुर के मुख्य सभागार में किया गया। राकेश राठी प्रोडक्शंस की इस प्रस्तुति में कविताओं और गीतों के जरिए प्रेम के उस शुद्ध, आध्यात्मिक और रूहानी स्वरूप को अभिव्यक्त किया गया, जो सामाजिक बंधनों, अपेक्षाओं और रिश्तों की पारंपरिक परिभाषाओं से परे आत्मा के स्तर पर महसूस होता है। इस काव्य यात्रा में अंशु हर्ष ने अपनी कविताओं और आवाज के माध्यम से प्रेम के उन अनकहे भावों को स्वर दिया, जिन्हें शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना आसान नहीं है। प्रस्तुति में अमित गंधर्व ने पियानो और वोकल तथा संदीप सोनी ने बांसुरी के जरिए काव्य और संगीत का भावपूर्ण संगम रचा। मीराबाई की भक्ति से मिली ‘प्लेटोनिक लव’ को प्रेरणा ‘प्लेटोनिक लव’ की संकल्पना के पीछे भक्त शिरोमणि मीराबाई का भगवान कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम अंशु हर्ष के लिए प्रमुख प्रेरणास्रोत रहा है। मीरा का प्रेम देह की सीमाओं से परे समर्पण, प्रतीक्षा, विश्वास और भक्ति का प्रतीक है। यह ऐसा भाव है, जिसे केवल शब्दों में बांधना संभव नहीं, बल्कि आत्मा की गहराइयों में अनुभव किया जा सकता है। अंशु हर्ष के लिए यह गर्व और सौभाग्य की बात है कि जिस मेड़ता की धरती ने मीराबाई जैसी महान भक्त कवयित्री को जन्म दिया, उसी शहर की बेटी होने का गौरव उन्हें भी प्राप्त है। मीरा की प्रेम चेतना और आध्यात्मिक विरासत से प्रेरित होकर उनकी कविताओं में ‘प्लेटोनिक लव’ का भाव आकार लेता है। आकर्षण से आगे आत्मिक जुड़ाव की कहानी ‘प्लेटोनिक लव 2.0’ प्रेम के उस अनूठे रिश्ते की काव्यात्मक अभिव्यक्ति है, जिसमें किसी तरह का स्वार्थ, अधिकार या अपेक्षा नहीं होती। यह जुड़ाव कभी ईश्वर के प्रति आस्था जैसा महसूस होता है, कभी उसके दर पर दीप जलाने जैसा और कभी मीरा के कृष्ण के प्रति समर्पण जैसा। यह भक्त और भगवान के बीच का संबंध भी हो सकता है और किसी ऐसे व्यक्ति से आत्मिक जुड़ाव भी, जिसकी मौजूदगी मन को सुकून देती है। अंशु हर्ष की कविताएं प्रेम के इस गहरे और संवेदनशील पक्ष को सामने लाती हैं। जीवन में पीड़ा आने पर मन सबसे पहले उसी व्यक्ति से अपना दर्द साझा करना चाहता है, जिससे उसका कोई अनकहा रिश्ता जुड़ा होता है। यह रिश्ता आकर्षण से शुरू होकर धीरे-धीरे विश्वास, अपनत्व और आत्मिक जुड़ाव में बदल सकता है। इसमें मिलने की अनिवार्यता नहीं, संवाद की शर्त नहीं और न ही किसी तरह के अधिकार का आग्रह होता है। साथ होने पर साथ का अहसास और दूरी में भी कायम रहने वाला रूहानी जुड़ाव ही इसकी खूबसूरती है। प्रेम को अपने भीतर महसूस करने का संदेश अंशु हर्ष की कविताएं और उनकी आवाज श्रोताओं को इस भागती-दौड़ती दुनिया में ठहरने, स्वयं से जुड़ने और प्रेम को अपने भीतर आत्मसात करने का संदेश देती हैं। उनकी काव्य प्रस्तुति व्यक्ति को अपने भीतर झांकने और उन अनकहे भावों को महसूस करने के लिए प्रेरित करती है, जिन्हें अक्सर जीवन की आपाधापी में पीछे छोड़ दिया जाता है। आज जब दुनिया संघर्ष, तनाव और संवेदनहीनता से घिरी हुई है, ऐसे समय में प्रेम को केवल किसी दूसरे व्यक्ति में खोजने के बजाय अपने भीतर महसूस करना और उसे जीवन का हिस्सा बनाना अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। ‘प्लेटोनिक लव 2.0’ इसी विचार को स्वर देती है कि प्रेम केवल एक अनुभूति नहीं, बल्कि जीवन को देखने की ऐसी दृष्टि है, जो इंसान को अधिक संवेदनशील, सहज और मानवीय बनाती है।