नाकाबंदी के दौरान पुलिस पर अंधाधुंध फायर करने और SHO के सिर पर गोली मारने के 11 साल पुराने मामले में बाड़मेर एससी-एसटी कोर्ट ने दो आरोपियों को सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोनों दोषियों को 7-7 साल की कठोर कारावास की सजा के साथ 50,500 रुपए का जुर्माना भी लगाया है। विशिष्ट न्यायाधीश डॉ. सरोज सींवर के सामने 21 गवाह और 35 डॉक्यूमेंट पेश किए गए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद गुरुवार को कोर्ट ने दिनेश उर्फ दिनीया और श्रीराम उर्फ संजय को सजा सुनाई है। नशा तस्करी कर रहे थे, नाकाबंदी तोड़ भागे पब्लिक प्रोसिक्यूटर स्वरूपसिंह भदरू ने बताया- 15 अप्रैल, 2015 को दोषी दिनेश उर्फ दिनीया निवासी भूरटिया हाल बलदेव नगर बाड़मेर और नई बांड गुड़ामालनी निवासी श्रीराम उर्फ संजय मादक पदार्थ (डोडा पोस्त) से भरी पिकअप लेकर राजसमंद के रेल मगरा से दिवेर की ओर जा रहे थे। रेल मगरा थाने ने कंट्रोल रूम और दिवेर थाने को सूचना दी। दिवेर थानाधिकारी रमेश कविया पुलिस जाब्ते के साथ सातपालिया सर्किल पर रात को नाकाबंदी कर संदिग्ध गाड़ियों की जांच कर रहे थे। इसी दौरान पिकअप गाड़ी में बैठे दिनेश और श्रीराम उस तरफ आए। नाकेबंदी और पुलिस को देखते ही दोनों पिकअप रिर्वस कर भागने की कोशिश करने लगे। अंधाधुंध फायरिंग में सिर में लगी गोली पुलिस को देखकर पहले दिनेश उर्फ दिनीया ने पुलिस पर फायरिंग की। जवाब में दोनों को भागने से रोकने की कोशिश में पुलिस थानाधिकारी ने चार राउंड और जवान ने एक राउंड सामने से फायरिंग की। गाड़ी चला रहे श्रीराम के पास बैठे दिनेश ने पुलिस की जीप पर अंधाधुंध फायर किए। एक गोली कांच तोड़ते हुए थानाधिकारी रमेश कविया के सिर में लगी। इस दौरान मची अफरा–तफरी और अंधेरे का फायदा उठाकर दोनों पिकअप सहित कच्चे रास्ते से होते हुए हाईवे की तरफ फरार हो गए। ऑपरेशन कर SHO के सिर से निकाली गोली पुलिस स्टाफ ने गंभीर रूप से घायल SHO रमेश कविया को हॉस्पिटल भर्ती करवाया। यहां ऑपरेशन कर उनके सिर में फंसी गोली निकाली गई। मामले में दिवेर थाने के एएसआई जगदीशचंद्र की ओर से दोनों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया। वादात के कुछ महीने बाद ही SHO पर गोली चलाने वाले दिनेश के खिलाफ बाड़मेर सदर थाने में आर्म्स एक्ट के तहत एक मामला दर्ज हुआ था। बाड़मेर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल में भेज दिया। तब राजसमंद पुलिस ने दिनेश को प्रोडक्शन वाॅरंट पर गिरफ्तार किया था। राजसमंद पुलिस ने दोषियों पर हत्या का प्रयास, आर्म्स एक्ट और पीडीपीपी एक्ट के तहत केस दर्ज किया। मामले की जांच करने के बाद चार्ज शीट पेश की गई। आरोपी पक्ष की ओर कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया गया कि मैं बाड़मेर जेल में हूं। मेरी फाइल को राजसमंद से बाड़मेर कोर्ट में ट्रांसफर किया जाए। इसके बाद दोषियों पर बाड़मेर एससी-एसटी कोर्ट में ट्रायल चला। दोनों को 7-7 साल का कठोर कारावास बाड़मेर एससी-एसटी कोर्ट के विशिष्ट न्यायाधीश डॉ. सरोज सींवर के समक्ष पब्लिक प्रोसिक्यूटर की ओर से 21 गवाह और 35 दस्तावेज–आर्टिकल पेश किए गए। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दोषियों को 7-7 साल की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 50,500 रुपए का जुर्माना भी लगाया है।