बाड़मेर पंचायत राज चुनाव-2026 को लेकर जिले में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। दूसरे चरण में होने वाले पंचायत समिति सदस्य चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच के बाद उम्मीदवारों की तस्वीर सामने आ गई है। जिले की 7 पंचायत समितियों के 109 सदस्य पदों के लिए कुल 781 नामांकन पत्र दाखिल किए गए। इनमें से 189 नामांकन खारिज हो गए, जबकि 79 नामांकन वापस लिए गए। अब 513 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। सोमवार को नामांकन वापसी का अंतिम दिन है। इसके बाद प्रत्याशियों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। जिले की बाड़मेर, बाड़मेर ग्रामीण, बाटाडू, भियाड़, बिशाला, डूंगेरों का तला और शिव पंचायत समितियों में सदस्य पदों के लिए 28 अक्टूबर को मतदान होगा। वहीं, सरपंच पदों के लिए 29 अक्टूबर को नामांकन दाखिल किए जाएंगे और 30 अक्टूबर को मतदान होगा। अंतिम दिन उमड़ी दावेदारों की भीड़ नामांकन प्रक्रिया के शुरुआती तीन दिनों में अपेक्षाकृत कम हलचल रही, लेकिन अंतिम दिन 16 अक्टूबर को नामांकन केंद्रों पर दावेदारों की भीड़ उमड़ पड़ी। चार दिनों में दाखिल 781 नामांकन पत्रों में से 639 अकेले अंतिम दिन जमा हुए। यह कुल नामांकन का करीब 81.8 प्रतिशत है। चार दिनों में रिकॉर्ड तोड़ 639 नामांकन भरे गए 13 अक्टूबर को जिले भर से मात्र 90 नामांकन दाखिल हुए। 14 अक्टूबर को गति थोड़ी बढ़ी और 104 फॉर्म जमा किए गए। 15 अक्टूबर को महज 25 फॉर्म आए। 16 अक्टूबर को अंतिम दिन समर्थकों के साथ पहुंचे दावेदारों ने रिकॉर्ड 639 नामांकन पत्र दाखिल किए। निर्दलीय बिगाड़ सकते हैं राजनीतिक दलों का गणित नामांकन के आंकड़ों के अनुसार, बाड़मेर पंचायत समिति में सबसे ज्यादा 138 नामांकन दाखिल हुए, जबकि शिव में 90 वैध उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। बिशाला में सबसे ज्यादा 39 नामांकन खारिज किए गए। नाम वापसी के बाद चुनावी मुकाबले की तस्वीर और स्पष्ट होगी। कई सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों के मैदान में बने रहने से कांग्रेस और भाजपा के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, पानी, बिजली और सड़कों जैसे स्थानीय मुद्दे भी चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं। आंकड़ों में अंतर, अंतिम सूची से मिलान जरूरी नामांकन से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों में कुछ विसंगतियां भी हैं। सातों पंचायत समितियों के लिए दिए गए वैध उम्मीदवारों के आंकड़ों का योग 513 के बजाय 513 ही है, लेकिन नामांकन, खारिज और वैध उम्मीदवारों के कुछ पंचायत समिति-वार आंकड़ों में अंतर दिखाई देता है। इसलिए प्रकाशन से पहले निर्वाचन कार्यालय की अंतिम सूची से सभी आंकड़ों का मिलान करना जरूरी है। सातों पंचायत समितियों में नामांकन की स्थिति