ब्यावर के नवकार भवन में चातुर्मास के दौरान भक्ति और तपस्या का अनूठा माहौल बना हुआ है। जैनाचार्य प्रवर विजयराज महाराज के सान्निध्य में बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्म-ध्यान में लीन हैं। इस दौरान 29 श्रावक-श्राविकाओं ने 30 उपवास की कठिन साधना पूरी की है, जबकि कई श्रद्धालु मासखमण (एक माह का उपवास) और उससे भी अधिक समय का कठिन तप कर रहे हैं। मेवाड़ी गेट स्थित नवकार भवन में मुनिराज और महासती मंडल के मार्गदर्शन में दैनिक धार्मिक गतिविधियां चल रही हैं। नवकार भवन और महासती मंडल के प्रवास स्थल 'सुख सागर' में रोजाना आत्मबोधि क्लास, जिनवाणी श्रवण, महामांगलिक और तत्वज्ञान पर चर्चा आयोजित की जा रही है। इन कार्यक्रमों में हिस्सा लेने और आचार्यश्री के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु ब्यावर पहुंच रहे हैं। नेमीचंद तातेड 'स्वाध्याय रत्न' से सम्मानित इसी बीच, साधुमार्गी शांत क्रांति जैन श्रावक संघ (ब्यावर) के नेमीचंद तातेड को उनकी तीन दशकों की निस्वार्थ धार्मिक सेवाओं के लिए 'स्वाध्याय रत्न' सम्मान से नवाजा गया है। यह सम्मान उन्हें श्री अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी शांत क्रांति जैन संघ की ओर से प्रदान किया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष राजू भाई भूरट ने तातेड को मोतियों की माला पहनाकर, शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर संघ के महामंत्री वीरेंद्र जैन, संरक्षक राजेंद्र कर्णावट, ब्यावर संघ अध्यक्ष संपतराज ढेढिया सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। तीन दशकों से धर्म और संस्कारों का प्रचार नेमीचंद तातेड जैनाचार्य विजय गुरु के परम भक्त हैं। वे पिछले 30 वर्षों से लगातार स्वाध्याय, साधु-संतों की सेवा और बच्चों में नैतिक व धार्मिक संस्कार गढ़ने के कार्य में समर्पित हैं। शास्त्रों और जैन थोकड़ों के गहरे ज्ञाता तातेड पर्युषण पर्व के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में जाकर धर्म देशना देते हैं। समाज में धार्मिक चेतना और संस्कारों के इसी प्रसार के लिए उन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान से सम्मानित किया गया है।