ऐतिहासिक सांस्कृतिक पहचान और लोक संस्कृति के प्रतीक 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले का गुरुवार को मेला प्रांगण में आतिशबाज़ी के सतरंगी नज़ारों, भक्तिमय धुनों और अटूट जनसैलाब के बीच हुए इस समापन समारोह में विकास और विरासत का अनूठा संगम देखने को मिला। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के मुख्य आतिथ्य और महापौर डॉ. अनसूया गोस्वामी की अध्यक्षता में आधिकारिक समापन की घोषणा की गई। समापन पर आतिशी विदाई का नज़ारा बेहद अद्भुत था। मेला प्रांगण में जैसे ही आतिशबाजी शुरू हुई, फायर टीम की मुस्तैदी के बीच सुनहरी और सतरंगी आतिशबाज़ी ने आकाश में अदभुत चित्र उकेर दिए। पूरा आसमान लाल, हरी और सुनहरी चमक बिखेरते तारों और तैरते चमकते सितारों से जगमगा उठा, जिसे हर दर्शक ने अपने कैमरे में कैद किया। विकास और विरासत का संगम: लोकसभा अध्यक्ष समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि कोटा की सांस्कृतिक धरोहर और मेलों की यह परंपरा हमें एक परिवार के रूप में जोड़े रखती है। 133 साल पुरानी इस विरासत के संरक्षण के साथ इसे आधुनिकता के आयामों से जोड़ना हमारी प्राथमिकता है। आगामी मेलों को और अधिक विशिष्ट रूप दिया जाएगा, जिससे देश भर के हस्तशिल्पियों, कारीगरों और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आजीविका के बेहतर अवसर मिल सकें। विजयश्री रंगमंच पर लोक नृत्य मेले के समापन अवसर पर पर्यटन विभाग, राजस्थान सरकार की ओर से विजयश्री रंगमंच पर 'लोक नृत्य महोत्सव' का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत बाड़मेर के गौतम परमार दल द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना और करौली के जल सिंह मीणा दल की पद दंगल प्रस्तुति से हुई।