पंचांग के अनुसार आषाढ़ अमावस्या मंगलवार को (14 जुलाई) मनाई जाएगी। ज्योतिष आचार्य सुरेश दाधीच ने बताया कि भौमवती अमावस्या के दिन स्नान, दान और पितृ-तर्पण का विशेष महत्व होता है। भौमवती अमावस्या दोपहर 3:15 बजे तक रहेगी। भौमवती अमावस्या पर नदी-स्नान करें। घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इससे सभी पापों का नाश होता है। 14 जुलाई को सुबह 9:06 बजे से दोपहर 02:12 बजे तक का समय स्नान-दान के लिए सबसे उत्तम है। दाधीच ने बताया कि गरुड़ पुराण के अनुसार अमावस्या पर पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध या पिंडदान करने से पितरों को मुक्ति मिलती है। घर में सुख-शांति आती है। इस दिन मेष और वृश्चिक राशि वाले मसूर की दाल, गुड़, तांबे का दान करें। मकर और कुंभ राशि वाले काले तिल, जूते-चप्पलों का दान करें। इस अमावस्या पर मंगलवार होने के कारण हनुमान जी की पूजा करना बहुत फलदायी होता है।