बीकाजी के सीएमडी शिवरतन अग्रवाल (74) का 23 अप्रैल को हार्ट अटैक से निधन हो गया था। इसे लेकर बुधवार को शहर के रविंद्र रंगमंच में श्रद्धांजलि सभा रखी गई। इस सभा में उनके बेटे दीपक अग्रवाल भावुक हो गए। आंखों से आंसू निकलते हुए कहा- मैं अपने पापा को गले लगााना चाहता था। साथ ही वहां मौजूद लोगों से कहा- मैं हमेशा आपके साथ रहूंगा। पिता को याद कर भावुक हुआ बेटा, कहा-गले नहीं लगा पाया दरअसल, शिवरतन अग्रवाल ‘फन्ना बाबू’ की याद में श्रद्धांजलि सभा रखी गई थी। इसमें बीकानेर शहर के लोग समेत शिवरतन अग्रवाल का पूरा परिवार वहां मौजूद था। इस दौरान बेटे दीपक को स्टेज पर बुलाया गया। जैसे ही वे बोलना शुरू हुए और वे भावुक हो गए। कुछ देर रुके और कहा- मेरी एक बात है जो मन में रह गई। पापा को कभी नहीं बोलते कि मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं…आई लव यू पापा…। मैं एनव्क्त पर हिम्मत नहीं कर पाया। मैं अपने पापा को गले लगाकर आई लव यू कहना चाहता था…लेकिन लगा नहीं पाया। ये लाइन कहते ही उनके आंसू निकलने लगे। बोले- मैं हमेशा बीकानेर का नाम रोशन करूंगा वे दोबारा कुछ देर चुप रहे और कहा- मैं हमेशा आपके (बीकानेर) के साथ रहूंगा। बीकानेर का नाम रोश करूंगा। मैंने अपने पिता से कारोबार से जुड़े कई काम सीखे, उनके एक्सपीरिएंस से बहुत कुछ सीखने को मिलाञ मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि मैं उनके पदचिन्हों पर चलकर अपने बिजनेस को और आगे बढ़ाऊं। श्रद्धांजलि सभा में बीकानेर के व्यापारिक, राजनीतिक और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग उपस्थित रहे। इसके अलावा बीकाजी और हल्दीराम परिवार के सभी सदस्य भी मौजूद रहे। बीकानेर से साल 1986 में हुई थी शुरुआत बिजनेस के बंटवारे के बाद शिवरतन अग्रवाल ने अपने खानदानी बिजनेस ‘हल्दी राम’ से अलग होकर खुद का बिजनेस शुरू करने के बारे में सोचा। अपनी अलग पहचान बनाने की जिद के साथ शिवरतन अग्रवाल बीकानेर पहुंच गए। यहां उन्होंने ‘शिवदीप फूड्स प्रोड्क्ट्स’ के नाम से भुजिया बनाने का बिजनेस शुरू किया। इसके साथ ही भारतीय स्नैक मार्केट की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक बीकाजी ब्रांड की शुरुआत हुई। एक यूनीक पहचान बनाने के लिए नाम रखा बीकाजी शिव रतन चाहते थे कि असली भारतीय टेस्ट को पूरी दुनिया में पहचान मिले। उन्हें लगा कि ब्रांड का नाम ऐसा हो जो सभी को आसानी से याद हो जाए और एक यूनीक पहचान भी दे। यह नाम बीकानेर शहर के संस्थापक राव बीका के नाम पर है। बीकानेर शहर का नाम भी राव बीका के नाम पर ही रखा गया था। 8वीं पास शिवरतन ने क्रिएटिव विजन से बनाया ब्रांड शिवरतन अग्रवाल ने केवल 8वीं तक पढ़ाई की है। उन्होंने अपने क्रिएटिव विजन से बीकाजी को एक ब्रांड बनाया। जब वे अपने बिजनेस की शुरुआत कर रहे थे तो उन्होंने कई देशों की यात्रा की। दरअसल, उस समय तक भुजिया केवल हाथों से ही बनाई जाती थी। किसी ने सोचा भी नहीं था कि इस इंडियन स्नैक को मशीनों से भी बनाया जा सकता है। मगर शिवरतन ने मशीन से भुजिया बनाने का सेट-अप बनाया। बीकाजी भारत का पहला ऐसा ब्रांड बना जिसने मशीन से भुजिया बनाई। इससे बीकाजी की प्रोडक्टिविटी और क्वालिटी दोनों बढ़ी। बीकाजी के प्रोडक्ट्स की मेकिंग से लेकर पैकिंग तक हर काम मशीन से होने लगा। बीकाजी आज इंटरनेशनल ब्रांड है इसलिए प्रोडक्ट्स में सभी पैरामीटर्स का ध्यान रखा जाता है। ये खबर भी पढ़ें… बीकाजी के CMD शिवरतन अग्रवाल का हार्ट अटैक से निधन:चेन्नई में ली अंतिम सांस, पत्नी के ऑपरेशन के लिए परिवार के साथ गए थे बिना शर्त दोस्तों-रिश्तेदारों को दिए थे बीकाजी के शोरूम:शिवरतन अग्रवाल से लोगों ने कहा था-भुजिया कहां बेचोगे; शेल्फ लाइफ बढ़ाकर विदेशों तक पहुंचाया प्रोडक्ट बीकाजी के CMD शिवरतन अग्रवाल का अंतिम संस्कार:5 क्विंटल चंदन की लकड़ी की चिता बनाई गई, 'फन्ना बाबू अमर रहे' के नारे लगे