बांसवाड़ा में सनातन की ध्वजा गगन को चूम रही : कार्यक्रम में कथावाचक स्वामी रमनराम ने कहा कि बंासवाड़ा को लोढ़ी काशी ऐसे ही नहीं कहा जाता यहां सनातन की ध्वजा गगन को चूम रही है। सनातन की एकता ने सभी को एक सूत्र में बांधकर रखा है। भक्तों में अटूट श्रद्धा भावना है, जिसके परिणाम स्वरूप लोढ़ी काशी अपने नाम को सार्थक कर रही है। संत रामप्रकाश महाराज ने कहा कि इस चातुर्मास में यहां धर्म की गंगा प्रवाहित हुई है। भारत माता मंदिर के परियोजना प्रमुख धर्मराज ने भी विचार व्यक्त किए। भास्कर संवाददाता| बांसवाड़ा शहर के सूरजपोल स्थित बड़ा रामद्वारा परिसर में संत रामप्रकाश महाराज के सान्निध्य में रामस्नेही संप्रदाय के स्वामी रमनराम महाराज का चातुर्मास शुक्रवार को पूर्ण हुआ। इस अवसर पर रामद्वारा में विभिन्न अनुष्ठानों के साथ सम्मान समारोह और महाप्रसादी का कार्यक्रम हुआ। चातुर्मास की संपन्नता और स्वामी के विदाई के क्षण पर श्रद्धालु भावुक हो उठे और भारी मन से उन्हें विदा किया। कार्यक्रमों की शुरुआत रामद्वारा में सुबह सवा नौ बजे पूजन और यज्ञ में आहुतियां देते हुए की गई। पं. राजीव त्रिवेदी के आचार्यत्व में मुख्य यजमान डॉ. सिद्धेश शर्मा व परिवारजनों के साथ दोनों संतों, अधिवक्ता लक्ष्मीकांत त्रिवेदी, अनुसुइया त्रिवेदी ने यज्ञ में आहुतियां दीं। पं. योग नारायण पंड्या, शशि शर्मा, पं. ललित द्विवेदी के मंत्रोच्चार के साथ श्रीफल होम किया। शाम चार बजे संगीतमय सुंदरकांड पाठ और संकीर्तन की शुरुआत स्वामी रमनराम के श्रीमुख से हुई। इसमें उन्होंने सुंदरकांड की चौपाइयों का मधुर आवाज में वाचन करते हुए माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद सम्मान समारोह हुआ। इसमें चातुर्मास कमेटी के अध्यक्ष मदन मोहन भट्ट, उपाध्यक्ष राजेंद्र द्विवेदी, अमृत सनाढ्य, ललित कंसारा, राकेश डामोर, जय गिरिराज, लक्ष्मीलाल, मुकेश भावसार, लक्ष्मीकांत त्रिवेदी, विनोद अग्रवाल व इंदु शुक्ला, निशा भट्ट, शीला भावसार, डिम्पल त्रिवेदी, रेखा कंसारा आदि ने संतों का सम्मान किया। वहीं, गायत्री परिवार की ओर से मनोहर जोशी, पुष्पेंद्र पंड्या व राजेश भावसार ने सम्मान किया। इसके साथ विभिन्न समाज व संस्थाओं ने भी संतों का सम्मान किया। प्रारंभ में स्वागत विहिप के प्रचारक जयंत द्विवेदी ने किया। संचालन अनन्त जोशी ने किया व आभार विनय भट्ट ने माना। रामद्वारा में अब तक नौ चातुर्मास: बड़ा रामद्वारा के संत राम प्रकाश महाराज ने बताया कि बड़ा रामद्वारा में वर्तमान चातुर्मास से पूर्व तक आठ चातुर्मास हुए। आज स्वामी रमनराम के चातुर्मास समापन के साथ यहां नौ चातुर्मास संपन्न हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान चातुर्मास तीन माह का रहा, जो 25 जुलाई 2026 को शुरू हुआ था। इस दौरान यहां प्रभु श्री राम की कथा का आयोजन भी किया गया। मैने तेरे ही भरोसे हनुमान सागर में नईया... संकीर्तन कार्यक्रम में स्वामी रमनराम ने मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे राम आएंगे, राम नाम के हीरे-मोती मैं बिखराऊं गली-गली, सियाराम जी का डंका लंका में, जैसे मधुर भजनों से श्रद्धालुओं को भक्ति के रंग में सराबोर कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने जब हाल ही में प्रसिद्ध हुए भजन मैने तेरे ही भरोसे हनुमान सागर में नईया डार दई..., सुनाया तो पूरा पांडाल भावुक हो गया और श्रद्धालु संत के साथ संगत किए बिना नहीं रह पाए।