चित्तौड़गढ़ जिले में रबी सीजन की बुवाई शुरू हो गई है। कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक 19,540 हेक्टेयर में बुवाई पूरी हुई है, जबकि कुल लक्ष्य 3,24,066 हेक्टेयर है। लहसुन की बुवाई 62.81% लक्ष्य तक पहुंच गई है, जबकि सरसों का आंकड़ा 35.64% है। दूसरी ओर, गेहूं और जौ की बुवाई अभी शुरू नहीं हुई है। मौसम के बदलते मिजाज और बाजार की मांग को देखते हुए किसानों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है, जिससे आने वाले हफ्तों में बुवाई के आंकड़ों में और ज्यादा तेजी आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। तिलहन और व्यावसायिक फसलों की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं किसान जिले में इस समय सबसे ज्यादा उत्साह सरसों और लहसुन की बुवाई को लेकर दिखाई दे रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जिले में सरसों की बुवाई के लिए कुल 40,120 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से अब तक 14,300 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में बुवाई का काम पूरा हो चुका है जो कि कुल लक्ष्य का लगभग 35.64 प्रतिशत है। इसके साथ ही, पूरे तिलहन वर्ग की कुल प्रगति भी 33.80 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसी तरह, नकदी और मसाला फसल के रूप में पहचानी जाने वाली लहसुन की फसल ने सबसे तेज रफ्तार पकड़ी है, जिसके तहत तय किए गए 5,445 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 3,420 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी है और यह 62.81 प्रतिशत के साथ सबसे आगे चल रही है। यह इस बात का साफ संकेत है कि स्थानीय किसान बाजार के रुझान को भांपते हुए उन फसलों को पहले बो रहे हैं जिनकी मांग और कीमत उन्हें अच्छी मिल सके। अनाज और दलहन की मुख्य फसलों की बुवाई में अभी भी बनी हुई है सुस्ती व्यावसायिक और तिलहनी फसलों में दिख रही इस तेज रफ्तार के ठीक विपरीत, जिले में अनाज और दलहन जैसी पारंपरिक खाद्यान्न फसलों की बुवाई फिलहाल काफी पीछे चल रही है। जिले की सबसे प्रमुख खाद्यान्न फसल गेहूं के लिए 1,75,100 हेक्टेयर और जौ के लिए 5,750 हेक्टेयर का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन इन दोनों ही फसलों में अभी तक बुवाई का खाता नहीं खुला है और आंकड़ा शून्य प्रतिशत पर ही रुका हुआ है। इसके अलावा, दलहनी फसलों में सिर्फ चने की बुवाई थोड़ी बहुत शुरू हुई है, जहां 83,200 हेक्टेयर के लक्ष्य में से 1,820 हेक्टेयर यानी करीब 2.19 प्रतिशत क्षेत्र में ही बोआई हो पाई है, जबकि मटर और मसूर जैसी अन्य दलहनी फसलें अभी इंतजार में हैं। इन सबका असर यह हुआ है कि कुल खाद्यान्न उत्पादन का शुरुआती आंकड़ा अब तक सिर्फ 0.69 प्रतिशत ही दर्ज किया जा सका है। कृषि जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे सर्दी और ठंड का असर बढ़ेगा, किसान इन फसलों की तरफ भी अपना ध्यान केंद्रित करेंगे। मसाला और औषधीय खेती को मिलेगा बढ़ावा जिले में उगाई जाने वाली अन्य मसाला, औषधीय और चारा फसलों की स्थिति पर नजर डालें तो ईसबगोल, मेथी बीज, कलौंजी, धनिया, जीरा और अफीम जैसी फसलों में अभी बुवाई का मुख्य दौर शुरू होना बाकी है। चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान रखने वाली अफीम फसल के लिए 1,940 हेक्टेयर का लक्ष्य तय है, जिसकी प्रक्रिया आने वाले दिनों में आगे बढ़ेगी। इसके अलावा, पशुओं के लिए बेहद जरूरी चारा फसलों जैसे रिजका, बरसीम और मेथी चरी के लिए भी 1,580 हेक्टेयर का क्षेत्र सुरक्षित है, जहां अभी बुवाई का काम शुरू नहीं हुआ है। अन्य सभी विविध फसलों को मिलाकर इस श्रेणी की कुल प्रगति फिलहाल 19.42 प्रतिशत तक ही पहुंच पाई है, जिसमें सबसे बड़ा योगदान अकेले लहसुन की बुवाई का रहा है। कृषि विभाग का समग्र आकलन और आने वाले समय की उम्मीदें संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) डॉक्टर शंकर लाल जाट ने बताया कि इस रबी सीजन के दौरान चित्तौड़गढ़ जिले में कुल 3,24,066 हेक्टेयर क्षेत्रफल में विभिन्न फसलों की बुवाई का बड़ा लक्ष्य रखा गया है, जिसके मुकाबले कुल 19,540 हेक्टेयर यानी लगभग 6.03 प्रतिशत क्षेत्र में बुवाई का काम पूरा हो चुका है। विभाग का मानना है कि यह अभी बुवाई का बिल्कुल शुरुआती चरण है और आने वाले दिनों में तापमान में गिरावट तथा त्योहारों के बाद खेतों में किसानों की सक्रियता बढ़ने से गेहूं, जौ और अन्य फसलों की बुवाई में भी भारी तेजी देखने को मिलेगी। विभाग द्वारा किसानों को खाद और उन्नत बीजों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं ताकि तय समय सीमा के भीतर जिले के सभी कृषि लक्ष्यों को आसानी से पूरा किया जा सके।