चित्तौड़गढ़ जिला परिषद चुनाव के नामांकन के आखिरी दिन शुक्रवार को बीजेपी से जुड़े कई बड़े राजनीतिक परिवारों की महिलाओं ने जिला परिषद सदस्य पद के लिए नामांकन दाखिल कर चुनावी मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। विधायक की पत्नी और भदेसर की पूर्व प्रधान सुशीला कंवर, पूर्व भूमि विकास बैंक अध्यक्ष की पत्नी रति पुरोहित, बीजेपी जिलाध्यक्ष की बेटी सीमा गाडरी और कपासन की पूर्व प्रधान की बहू भावना राणावत ने जिला परिषद सदस्य पद के लिए फॉर्म भरा। जिला प्रमुख की सीट इस बार अनारक्षित महिला वर्ग के लिए आरक्षित है, ऐसे में जिला परिषद चुनाव में उतर रहे इन प्रमुख नामों पर राजनीतिक नजरें भी बनी हुई हैं। चुनाव परिणाम के बाद बनने वाले समीकरणों में इन चेहरों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आखिरी दिन कलेक्ट्रेट में सुबह से रही प्रत्याशियों और समर्थकों की भीड़ जिला परिषद की 35 सीटों और चित्तौड़गढ़ पंचायत समिति सदस्य के 29 पदों के लिए नामांकन दाखिल करने का शुक्रवार को आखिरी दिन था। अंतिम दिन जिला कलेक्ट्रेट परिसर में सुबह से ही प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की भीड़ जुटने लगी थी। अलग-अलग क्षेत्रों से आए उम्मीदवार अपने समर्थकों के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंचे। कई जगह समर्थकों ने अपने प्रत्याशी के पक्ष में नारे लगाए तो कई प्रत्याशी सादगी के साथ नामांकन प्रक्रिया पूरी करने पहुंचे। नामांकन के आखिरी दिन होने के कारण कलेक्ट्रेट में दिनभर राजनीतिक गतिविधियां दिखाई दीं। जिला परिषद चुनाव में इस बार कई सीटों पर मुकाबला रोचक माना जा रहा है। खासतौर पर महिला आरक्षित जिला प्रमुख सीट के कारण जिला परिषद सदस्य पद के चुनाव में उतरने वाले प्रमुख चेहरों पर राजनीतिक दलों के साथ आम लोगों की भी नजर बनी हुई है। सुशीला कंवर ने वार्ड 16 से दाखिल किया नामांकन भदेसर की पूर्व प्रधान और विधायक चंद्रभान सिंह आक्या की पत्नी सुशीला कंवर ने जिला परिषद वार्ड संख्या 16 से नामांकन दाखिल किया। वह सादगी से अपने समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचीं। नामांकन प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्होंने चुनावी मैदान में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। सुशीला कंवर इससे पहले पंचायत स्तर की राजनीति में सक्रिय रह चुकी हैं। भदेसर प्रधान के रूप में काम करने के बाद अब वह जिला परिषद सदस्य पद के लिए चुनाव लड़ रही हैं। राजनीतिक परिवार से जुड़े होने के कारण उनके नामांकन को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में भी चर्चा रही। रति पुरोहित समेत अन्य प्रमुख चेहरों ने भी भरे फॉर्म पूर्व भूमि विकास बैंक अध्यक्ष की पत्नी रति पुरोहित ने जिला परिषद वार्ड संख्या 5 से नामांकन दाखिल किया। वे अपने कई समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंची। इस दौरान समर्थकों ने सांवलिया सेठ के जयकारे लगाए। इसी तरह बीजेपी जिलाध्यक्ष की बेटी सीमा गाडरी ने भी जिला परिषद सदस्य पद के लिए वार्ड नंबर 4 नामांकन भरा। इसके अलावा कपासन की पूर्व प्रधान की बहू भावना राणावत ने भी चुनाव मैदान में उतरने के लिए फॉर्म जमा किया। बीजेपी से जुड़े इन नामों के सामने आने के बाद जिला परिषद चुनाव में पार्टी के अंदर संभावित समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि जिला प्रमुख को लेकर अंतिम फैसला चुनाव परिणाम आने और पार्टी स्तर पर मंथन के बाद ही होगा। फिलहाल सभी प्रत्याशी जिला परिषद सदस्य पद के चुनाव पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। कांग्रेस से मंजू देवी जागेटिया ने दाखिल किया नामांकन कांग्रेस की ओर से कन्नौज ग्राम पंचायत की पूर्व सरपंच मंजू देवी जागेटिया ने जिला परिषद वार्ड संख्या 21 से नामांकन दाखिल किया। मंजू देवी पंचायत स्तर पर सक्रिय रही हैं और अब जिला परिषद चुनाव में उतर रही हैं। पार्टी की ओर से प्रत्याशियों के चयन और चुनावी रणनीति को लेकर स्थिति नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद साफ होगी। कांग्रेस भी अब अपने प्रत्याशियों के पक्ष में चुनावी तैयारी तेज करेगी। नामांकन के दौरान समर्थकों को रोकने पर पुलिस से हुई बहस नामांकन प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से प्रत्याशी और उसके प्रस्तावक को ही नामांकन कक्ष तक जाने की अनुमति दी गई थी। इसके बावजूद कई समर्थक अंदर जाने का प्रयास करते रहे। इस दौरान पुलिसकर्मियों और समर्थकों के बीच कहासुनी भी हुई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्था संभाली और नियमों के अनुसार प्रत्याशी व प्रस्तावक को ही अंदर जाने दिया गया। RO कक्ष में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मी लगातार तैनात रहे। अब चुनावी मैदान में मुकाबला तेज होगा नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होंगी। प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्रों में संपर्क अभियान शुरू करेंगे। जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्यों के लिए चुनाव तीसरे चरण में 3 नवंबर को होगा। इस बार जिला प्रमुख की सीट महिला वर्ग के लिए आरक्षित होने के कारण जिला परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की रणनीति भी खास रहेगी।