इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) के बिरधवाल हेड पर रविवार को अनूपगढ़ ब्रांच के किसान अपनी मांग को लेकर धरने पर बैठ गए हैं। किसानों की मांग है कि तय रेग्युलेशन को बदलकर अनूपगढ़ ब्रांच में तुरंत पानी छोड़ा जाए। दूसरी ओर नहर प्रशासन ने किसानों की इस मांग को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह नाजायज करार दिया है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि दबाव में आकर नहरों का तय चक्र बदला गया, तो पूरी नहर प्रणाली का जल प्रबंधन धराशायी हो जाएगा। सिंचाई विभाग के तय शेड्यूल के मुताबिक तीन समूह की बारी में अनूपगढ़ ब्रांच घ, समूह की बारी में आती है। यानी नियम अनुसार इस ब्रांच को चलने में अभी करीब साढ़े आठ दिन का समय बाकी है। लेकिन किसान मांग कर रहे हैं कि रविवार (18 तारीख) से शुरू हुई, ग समूह की बारी में ही अनूपगढ़ ब्रांच को चालू किया जाए। नहर प्रशासन का तर्क है कि प्रत्येक नहर का अपना निश्चित रेग्युलेशन और वरीयता होती है। यदि आज अनूपगढ़ ब्रांच के किसानों के दबाव में आकर बदलाव किया गया तो कल कंवरसेन, कोलायत और जैसलमेर लिफ्ट नहरों के किसान भी हेड पर आकर जबरन पानी की मांग करेंगे, जिससे व्यवस्था संभालना असंभव हो जाएगा। तकनीकी पेंच: 2400 क्यूसेक चले भी तो सूख जाएंगी ग समूह की नहरें यदि प्रशासन किसानों के दबाव में आकर अनूपगढ़ ब्रांच में उसकी क्षमता के अनुसार 2,400 क्यूसेक पानी छोड़ भी देता है, तो ग समूह की प्राथमिकता वाली नहरों रावतसर, नौरंगदेसर, दंतौर और चारणवाला ब्रांच के लिए पानी ही नहीं बचेगा। ग समूह की बारी में इन नहरों का पहला हक (वरीयता) है। ऐसे में एक तरफ का पानी दूसरी तरफ डाइवर्ट करने से मुख्य समूह की नहरें पूरी तरह सूख जाएंगी, जिससे एक नया जल-विवाद खड़ा होना तय है। बिरधवाल हेड पर किसानों के जमावड़े और रुख को देखते हुए अब पुलिस और प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। आवक घटी, अब 3 समूहों में ही मिलेगा पानी पानी की उपलब्धता के आंकड़े भी किसानों की मांग के आड़े आ रहे हैं। अब तक चार समूहों की बारी के आधार पर पौंग बांध से 10,800 क्यूसेक पानी की मांग की जा रही थी। रविवार शाम और सोमवार से तीन समूह की बारी की व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके तहत पौंग बांध से अब केवल 8,500 क्यूसेक पानी ही मिल पा रहा है। गौरतलब है कि बीते 15 दिनों के दौरान जैसलमेर क्षेत्र को पानी की एक बूंद भी नहीं मिली थी। जैसे-तैसे जैसलमेर को 3,000 क्यूसेक पानी देकर वहां के किसानों के बढ़ते आक्रोश को शांत किया गया, हालांकि उनकी मांग की भी पूर्ण भरपाई नहीं हो पाई है। समूह की द्वितीय चरण (सेकेंड स्टेज) की नहरों में पानी छोड़ना शुरू कर दिया गया है। जो रेग्युलेशन बोर्ड द्वारा पहले से तय किया गया है, पानी की आपूर्ति उसी के अनुसार की जा रही है। इसमें किसी तरह का अनधिकृत बदलाव संभव नहीं है। विवेक गोयल, चीफ इंजीनियर आईजीएनपी