पिछले एक दशक में जयपुर ने अपनी विरासत, स्पिरिचुअलिटी, हेरिटेज और शांत वातावरण को बनाए रखते हुए हायर एजुकेशन का मजबूत केंद्र बनाया है। दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों की भागदौड़ से दूर छात्र यहां आकर सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि एक पूरी लाइफस्टाइल और भारतीय पहचान पा रहे हैं। यहां ट्रैफिक कम है, समय ज्यादा है और बच्चे शहर को अपना कैंपस मानते हैं। ग्लोबल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (GIT) ने जयपुर को इस मुकाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। इस साल GIT को 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यहां से 15,000 से ज्यादा ग्रेजुएट्स निकल चुके हैं जो 100 से अधिक देशों में काम कर रहे हैं। संस्था ने स्कूल स्तर पर भी प्रवेश किया। मेयो स्कूल के जरिए प्राइमरी से लेकर हायर एजुकेशन तक की पूरी यात्रा तैयार की जा रही है। नमन कंदोई, डायरेक्टर, ग्लोबल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मयूर स्कूल जयपुर ने बताया कि स्कूल इसलिए शुरू किया गया ताकि बच्चे कोचिंग कल्चर और डमी स्कूल की सोच से बचकर ओपन माइंड, लाइफलॉन्ग लर्नर और सच्चे इंजीनियर बन सकें। आज के AI युग में GIT ने छात्रों और फैकल्टी दोनों को तैयार किया। AI को सिर्फ कोर्स नहीं बल्कि डिसरप्टर मानते हुए बेसिक फ्रेमवर्क्स (न्यूरल नेटवर्क्स, डिसीजन ट्रीज, रिग्रेशन) सिखाए जा रहे हैं। हर छह महीने में बदलते AI ट्रेंड्स के साथ एडाप्टिविटी पर फोकस है। स्टार्टअप्स में GIT पायनियर रहा। 2010-12 से यहां कई सफल स्टार्टअप्स निकले जो आज सैकड़ों मिलियन डॉलर की वैल्यूएशन पर पहुंच चुके हैं। इनक्यूबेशन सपोर्ट, सीड फंडिंग और इकोसिस्टम के जरिए छात्रों को उद्यमी बनाया जा रहा है। GIT स्कूल से शुरू होकर AI, स्टार्टअप्स और ग्लोबल सहयोग तक छात्रों को भविष्य के लिए तैयार कर जयपुर को शिक्षा का सशक्त हब बना रहा है।