बांसवाड़ा | संयुक्त राष्ट्र जहां दुनियाभर में इंसानी गरिमा और अधिकारों की रक्षा की बात करता है, वहीं गोविंद गुरु ने एक सदी पहले ही अपने 33 कुरुड़ (नियमों) के माध्यम से स्थानीय स्तर पर इसकी शुरुआत कर दी थी। इसमें उन्होंने समानता का संदेश दिया, जिसमें समाज में ऊंच-नीच और भेदभाव को खत्म करना प्रमुख था, जिसे आज संयुक्त राष्ट्र संघ भी आगे बढ़ा रहा है। गोविंद गुरु ने व्यसन मुक्ति और शिक्षा के तहत शराब व कुप्रथाओं का त्याग कर शिक्षा व स्वच्छता को अपनाने का संदेश दिया। आज यूएन भी अच्छे स्वास्थ्य और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा पर जोर दे रहा है। शांति और न्याय की जो बात संयुक्त राष्ट्र संघ कर रहा है, उसके लिए भी गोविंद गुरु संदेश दे चुके हैं। इसमें उन्होंने आपस के विवादों को कोर्ट-कचहरी या हिंसा के बजाय पंचायत के माध्यम से आपसी सहमति से सुलझाने की समझाइश दी थी। गोविंद गुरु का ‘भगत आंदोलन’ पूरी तरह शांति, भाईचारे और अहिंसा पर आधारित था। यही वह बुनियादी स्तंभ है, जिस पर संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) की स्थापना की गई है। सामाजिक चिंतक और लेखक रमेशचंद्र वडेरा के अनुसार गोविंद गुरु के विचार और नीतियां आज भी और आने वाले समय में भी प्रासंगिक रहेंगी। उन्होंने स्वतंत्रता और स्वयं के अधिकारों की रक्षा के लिए न सिर्फ शांति और अहिंसा का रास्ता अपनाने का पाठ पढ़ाया बल्कि स्वच्छता और सामाजिक एकता की शिक्षा भी दी। आगे जाकर संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना भी इन्हीं सभी सिद्धांतों के लिए की गई। उनका यह संदेश हर समय प्रासंगिक रहेगा कि दुनिया में शांति केवल हथियारों से नहीं, बल्कि विचारों की पवित्रता और आपसी सद्भाव से आएगी। जीजीटीयू में हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ. मनोज पंड्या का मानना है कि मानगढ़ धाम केवल एक स्मारक नहीं, वैश्विक शांति और बंधुत्व का प्रतीक है। यूएन डे के मौके पर इस स्थल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए क्योंकि यहां की मिट्टी का कण-कण शांतिपूर्ण सह अस्तित्व की गवाही देता है। संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना जिस विश्व बंधुत्व, समानता और शांति की स्थापना के लिए 24 अक्टूबर 1945 को हुई थी वह अभियान तो आदिवासी क्षेत्र वागड़ के मानगढ़ धाम में 1913 में ही गोविंद गुरु ने शुरू कर दिया था। ऐसे में आज संयुक्त राष्ट्र दिवस पर बांसवाड़ा का मानगढ़ धाम दुनिया को यह याद दिलाता है कि वैश्विक लक्ष्यों को हासिल करने की ताकत हमेशा स्थानीय प्रयासों और शांतिपूर्ण संकल्पों से ही संभव होती है।