विजयादशमी के पावन पर्व पर जयपुर स्थित गुप्त वृन्दावन धाम में भक्ति, आस्था और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। भगवान श्रीराम के हाथों रावण दहन होते ही पूरा धाम ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से गूंज उठा। मंदिर परिसर में दशहरे का पर्व पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान श्री श्री कृष्ण-बलराम के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। मंदिर में विशेष रामलीला, पालकी उत्सव और हरिनाम संकीर्तन सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन हुए। विजयादशमी के अवसर पर गुप्त वृन्दावन धाम में विशेष रामलीला का आयोजन किया गया, जिसमें रामायण के अरण्य कांड का मंचन हुआ। लगभग दो घंटे तक चले इस मंचन में भगवान श्रीराम के वनवास काल की महत्वपूर्ण घटनाओं को कलाकारों ने अपनी भाव-भंगिमाओं और अभिनय के माध्यम से जीवंत किया। रामलीला के दौरान शूर्पणखा प्रसंग, खर-दूषण वध और त्रिशिरा वध के दृश्यों का मंचन किया गया। इसके बाद मारीच के स्वर्ण मृग का रूप धारण करने, रावण द्वारा साधु का वेश बनाकर माता सीता का हरण करने और माता सीता की रक्षा के लिए पक्षीराज जटायु के रावण से युद्ध करने के प्रसंग प्रस्तुत किए गए। इन दृश्यों के माध्यम से भगवान श्रीराम की वनवास यात्रा और रामायण की महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्शाया गया। मंदिर परिसर में रावण दहन मुख्य आकर्षण रहा। जैसे ही भगवान श्रीराम ने रावण दहन के लिए बाण चलाया, वहां मौजूद श्रद्धालुओं ने ‘जय श्रीराम’ के जयकारों के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया। विजयादशमी के इस आयोजन में बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया। रावण दहन के दौरान श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला। परिवारों के साथ पहुंचे लोगों ने धार्मिक आयोजन में भाग लिया और भगवान श्रीराम के आदर्शों को याद किया। दशहरे के अवसर पर गुप्त वृन्दावन धाम को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया। मंदिर की सजावट ने पूरे परिसर को आकर्षक रूप दिया। दिनभर धार्मिक गतिविधियों के बीच श्रद्धालुओं ने पालकी उत्सव और हरिनाम संकीर्तन में भाग लिया। पूरे जयपुर से हजारों लोग इस आयोजन में शामिल होने पहुंचे। पालकी उत्सव के दौरान भक्तिमय वातावरण रहा, वहीं हरिनाम संकीर्तन में श्रद्धालुओं ने भगवान के नाम का गुणगान किया। मंदिर में भगवान श्री श्री कृष्ण-बलराम के दर्शन के लिए भी भक्तों की आवाजाही रही।