जिले में नशे का अवैध कारोबार रोकने के लिए प्रशासन ने एक बार फिर सख्त निर्देश जारी किए हैं। तस्करों के नेटवर्क की पहचान होगी। मेडिकल स्टोरों के औचक निरीक्षण होंगे। हाईवे के होटल-ढाबों पर निगरानी बढ़ेगी। शिक्षण संस्थानों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री पर शिकंजा कसा जाएगा। शुक्रवार को जिला कलेक्टर अपर्णा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई जिला नार्को कॉर्डिनेशन सेंटर (एनकॉर्ड) की बैठक में नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के निर्देश दिए गए। पुलिस अधीक्षक सतवीर सिंह ने भी तस्करों के नेटवर्क को चिह्नित कर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया। निर्देशों की फेहरिस्त लंबी, कार्रवाई का हिसाब कौन देगा? बैठक में नशा मुक्ति केंद्रों के निरीक्षण, मेडिकल दुकानों की जांच, शराब ठेकों के समय की पालना, संदिग्ध स्थानों पर सीसीटीवी निगरानी और युवाओं को जागरूक करने जैसे मुद्दे उठे। पुलिस, चिकित्सा, शिक्षा और आबकारी विभाग को मिलकर काम करने की हिदायत भी दी गई। सवाल यही है कि यदि हर बैठक में इन्हीं बिंदुओं पर चर्चा हो रही है, तो क्या पिछली बैठकों के निर्देशों की समीक्षा भी उतनी ही गंभीरता से हो रही है? कितने संदिग्ध ठिकानों की जांच हुई, कितनी शिकायतों का सत्यापन हुआ और कितने मामलों में कार्रवाई की गई—इन सवालों के जवाब भी जनता के सामने आने चाहिए। बैठक से बाहर निकलते ही अभियान की रफ्तार धीमी न पड़े बैठक में अतिरिक्त जिला कलेक्टर सोहन सिंह नरुका, सीएमएचओ डॉ. आशीष सिंह शेखावत, सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता जगदीश प्रसाद यादव और जिला परिवहन अधिकारी सुनील कुमार सैनी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।