प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल सवाई मानसिंह (SMS) में इन दिनों एक जनजागरूकता के पोस्टर पर धार्मिक विवाद शुरू हो गया। हॉस्पिटल सीनियर फेकल्टी डॉक्टर्स वाट्सएप ग्रुप पर आपस में ही भिड़ गए। पोस्टर शेयर होने के बाद मैंबर्स में पॉजिटिव और नेगेटिव कमेंट्स किए। कुछ सीनियर फेकल्टी ने तो हिंदू-मुस्लिम का रंग देते ईरान-इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध से जुड़े कमेंट्स करके आपनी आपत्ति जताई। दरअसल एसएमएस के ईएनटी विभाग ने पटाखों के शोर से कानों को होने वाले नुकसान की जानकारी आमजन में के लिए जनजागरूकता का पोस्टर बनाकर उसे फेकल्टी के ग्रुप में शेयर किया। इस पोस्टर में नुक्कड़ नाटक के जरिए इस प्रोग्राम को चलाने का निमंत्रण दिया। लेकिन जैसे ही पोस्टर हॉस्पिटल के सीनियर फेकल्टी डॉक्टर्स के ऑफिशियल वाट्सएप ग्रुप पर शेयर हुआ वैसे ही विवाद छिड़ गया। ये हुआ विवाद ईएनटी विभाग की एचओडी डॉ. रेखा हषवर्धन ने इस प्रोग्राम की सूचना और पोस्टर मेडिकल टीचर्स के ऑफिशियल ग्रुप पर डाली। जिस पर विभाग के प्रोफेसर और आरयूएचएस के प्रिंसिपल डॉ. मोहनीश ग्रोवर ने बधाई देते हुए इसे ''अच्छी पहल'' बताई। नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर और यूनिट हैड डॉ. धनंजय अग्रवाल ने लिखा '' क्यों कुछ लोग दीपावली जैसे विशेष त्यौहार पर दर्द क्यों होता है, आखिरी उनका इसके पीछे मकसद क्या है?'' जे.के. लॉन हॉस्पिटल से रिटायर्ड शिशु रोग विशेषज्ञ रामबाबू शर्मा लिखते है '' हर धर्म में जश्न मनाने के लिए कुछ न कुछ होता है। हर हिंदू त्योहार को ही क्यों निशाना बनाया जाता है? किसी त्योहार पर इतनी भारी संख्या में पशु-हत्या होती है, लेकिन कोई भी उन्हें सलाह देने की हिम्मत नहीं करता। मुस्लिम हस्तियां उन्हें अहिंसा पर सलाह क्यों नहीं देतीं? कुरान में भी इस तरह की हत्याओं का कोई जिक्र नहीं है।'' रामबाबू शर्मा यहीं नहीं रूके उन्होंने आगे लिखा ‘’4 साल से रूस-युक्रेन युद्ध में हर रोज मिसाइलें फायर हो रही है, 3 साल से इजरायल-हमास हर रोज रॉकेट फायर कर रहे है, किसी को कोई प्रोब्लम नहीं हुई। 7 माह से अमेरिका-ईरान युद्ध, एक माह से साऊदी-हूती विद्रोहियों का युद्ध लेकिन किसी को कोई दिक्कत नहीं। लेकिन रविवार को दीपावली होने पर पर्यावरण खतरे में, ग्लोबल वार्मिंग पीक पर, ग्लेशियर पिघल रहे है। कुत्तों को गंभीर मानसिक आघात होता है। सीनियर यूरोलॉजिस्ट और सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. नचिकेत व्यास ने इसका समर्थन किया। उन्होंने लिखा ''क्या हम सभी सिर्फ अपने काम से काम रख सकते हैं और जैसे चाहें वैसे त्योहार मना सकते हैं।'' डॉक्टर वंदना मंगल लिखती है '' हर कोई उचित सम्मान का हकदार है, जिन लोगों को चिकित्सीय बीमारियां (मेडिकल इलनेस) हैं, उनका विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके साथ ही हमारे त्योहार रोजमर्रा की दिनचर्या से एक सुखद बदलाव हैं, उन्हें पूरे पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जाना चाहिए, इस पर कोई मतभेद नहीं है। आइए हम सब दीपोत्सव को उसकी सच्ची भावना के साथ मनाएं। इस दीपावली पर अपना शहर दीयों से जगमग कर दें और प्रभु राम का स्वागत करें'' एसएमएस में सीनियर सर्जन डॉ. ओमप्रभा लिखती है : '' दीपावली कभी पटाखों का त्यौहार नहीं रहा। यह केवल रोशनी, मिठाइयों और भाईचारे का एक पवित्र उत्सव था''