बाड़मेर एसीबी ने जैसलमेर के मोहनगढ़ स्थित पशुपालन विभाग में कार्रवाई करते हुए डॉ. राघव डोई और पशुधन निरीक्षक सोनू को 3 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने ऊंट संरक्षण योजना के तहत अनुदान पास करवाने के लिए रिश्वत मांगी थी। आरोप है कि मामले में डॉक्टर के कहने पर ही रिश्वत की राशि ली गई। एसीबी टीम फिलहाल पूरे मामले की जांच पड़ताल करने के साथ उनके ठिकानों की जांच कर रही है। फोन पे से लिए थे हजार रुपए जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता की दो ऊंटनियों ने बच्चों को जन्म दिया था। उसने ऊंट संरक्षण योजना के तहत पशुपालन विभाग में 2 आवेदन किए थे। इन आवेदनों का सत्यापन पशु चिकित्सक और पशुधन सहायक द्वारा किया जाता है। सत्यापन के एवज में एक फॉर्म के 2 हजार रुपए लेना तय हुआ। दोनों फर्मों के पशुधन सहायक ने 4 हजार रुपए रिश्वत की डिमांड की थी। इसकी शिकायत परिवादी ने बाड़मेर एसीबी से की। इसके बाद एसीबी के सत्यापन के दौरान 1 हजार रुपए फोन-पे से लिए गए। इसका वेरिफिकेशन किया गया। लोअर की जेब में रखी रकम बाड़मेर एसीबी के एएसपी नरेंद्र कुमार अणखिया ने बताया- आरोपी पशुधन निरीक्षक सोनू रेगर की ओर से 1000 रुपए शिकायतकर्ता से जरिये फोन पे लिए। इसके बाद आज लेन-देन पशु हॉस्पिटल मोहनगढ़ में आरोपी डॉ. राघव डोई के कहे अनुसार उनके समक्ष ही आरोपी सोनू रैगर ने परिवादी से शेष रिश्वत की राशि 3000 रुपए ली। खुद के पहने हुए लोअर के की जेब में रखने के बाद दोनों आरोपियों को मौका स्थल से ही रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। रिश्वत की रकम सोनू से बरामद की गई। क्या है ऊंट संरक्षण योजना ऊंट संरक्षण योजना के तहत ऊंटनी के बच्चे के जन्म पर पशुपालक पशुपालन विभाग में आवेदन करता है। इस स्कीम के तहत रुपए 10,000-10,000 की दो किस्त (गर्भवती ऊंटनी के संरक्षण के लिए प्रसव पूर्व व प्रसव पश्चात उसके बच्चे/टोडिये के लिए) दी जाती है।