जोधपुर के महात्मा गांधी हॉस्पिटल में दो मरीजों की हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी की गई। इस ऑपरेशन की खास बात ये रही कि दोनों मरीजों की नसों को काटे बिना हिप​ रिप्लेसमेंट किया गया। एमजीएच के डॉक्टर्स ने नसों के बीच से रास्ता बनाया और खून की नसों को साइड कर इस ऑपरेशन को किया। इनमें से एक ऑपरेशन एक महीने पहले और दूसरा ऑपरेशन करीब 15 दिन पहले हुआ था। इनमें से एक 24 साल के युवक के देसी दवाइयों से खून का दौरा बंद हो गया था। वहीं दूसरी महिला मरीज के भी हड्डी गलने लग गई थी। चलना फिरना बंद हो गए थे, सहारा लेकर चलना पड़ता था एमजीएच के बॉन एंंड जॉइंट डिपार्टमेंट के डॉक्टर किशोर रायचंदानी और उनकी टीम ने दोनों मरीजों की जांच की और फिर ऑपरेशन किया। विभाग के सहायक आचार्य डॉ. निरोत्तम सिंह ने बताया कि 24 साल का युवक फलोदी और 34 साल की महिला पाली जिले की रहने वाली है। दोनों की हड्डियां गलने की वजह से चल-फिर नहीं सकते थे। हालात ऐसी थी कि चलने-फिरने के लिए भी सहारा लेना पड़ता था। ऐसे में डायरेक्ट एंटीरियर एप्रोच (DDA) तकनीक से इन दोनों का हिप रिप्लेसमेंट किया गया। उन्होंने बताया- ये मसल-स्पेयरिंग टेक्नीक है, इसमें मसल्स को काटने के बाद इनके बीच से रास्ता बनाकर सर्जरी की जाती है ताकि मांसपेशियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचे। पाली जिले की महिला का भी इसी तकनीक से ऑपरेशन किया गया। इसके बाद ये महिला 10 से 15 दिनों में ही चलने-फिरने लग गई थी और स्वस्थ होने के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. अरुण कुमार वैश्य ने बताया कि मॉर्डन टेक्नीक से एमजीएच हॉसिपटल में इस तरह के जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी की जा रही है। एक्सपर्ट बोले- आगे की तरफ से चीरा लगाया, 10 दिन में चलने-फिरने लगा मरीज ऑपरेशन करने वाली टीम के डॉक्टर्स ने बताया कि इस तरह की सर्जरी में पीछे की तरफ से चीरा लगाया जाता है। लेकिन, इस तकनीक में दोनों मरीजों को आगे की तरफ से चीरा लगाकर रिप्लेसमेंट सर्जरी की गई। ऐसे में मरीज को ब्लड लॉस भी नहीं हुआ और ऑपरेशन के दौरान खून चढ़ाने की भी जरूरत नहीं पड़ी। खास बात ये है कि इस टेक्नीक से किए ऑपरेशन से मरीज 10 से 12 दिन में ही चलने-फिरने लग गया। इससे पहले फलोदी जिले का रहने वाला मरीज इस बीमारी से एक साल से इस बीमारी से परेशान था। इलाज के लिए देसी दवाइयां ली, जिससे ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हुआ। जब मरीज एमजीएच पहुंचा तो उसकी दोबारा स्क्रीनिंग की गई और सर्जरी की गई। अब उसे एक-दो दिन में छुट्टी भी दे दी जाएगी। डॉक्टरों की ये टीम रही शामिल ऑपरेशन में डॉ. किशोर रायचंदानी के साथ डॉ. निरोत्तम सिंह, डॉ. मनोज रेहड़ू, रेजिडेंट डॉ. आदित्य तथा डॉ. अंकित कुमार मौजूद थे। इसके साथ ही एनेस्थीसिया विभाग से सह-आचार्य डॉ. अभिलाषा थानवी, रेजिडेंट डॉ. प्रद्युम्न, डॉ. अमित ढाका, नर्सिंग स्टाफ में वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी गोकुल पटेल, निशा, राजेश, प्रकाश, गणपत एवं रमेशी और सपोर्ट स्टाफ में विकास, ज्ञानप्रकाश एवं अकरम का योगदान रहा। इस ऑपरेशन के बाद फिजियोथे​रेपिस्ट प्रियंका, नीलम गौड़, आरती एवं आर.आर.सी. स्टॉफ इन्द्रा सोलंकी ने भी मदद की। ऑपरेशन के लिए हॉस्पिटल के सुप्रीडेंट डॉ. फतेह सिंह भाटी और मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. बीएस जोधा ने पूरी टीम को बधाई दी।