फलोदी, जोधपुर और जैसलमेर जिलों के किसानों के लिए डीएपी खाद की कमी से राहत मिली है। गुरुवार रात को गुजरात से डीएपी लेकर एक मालगाड़ी फलोदी रेलवे स्टेशन पहुंची। इसमें भारत डीएपी (आईपीएल) कंपनी के 38 हजार से अधिक बैग थे, जो 30 डिब्बों में आए थे। मजदूरों ने पूरी रैक खाली कर दी है। अब यहां से ट्रकों के माध्यम से फलोदी, जैसलमेर और जोधपुर जिलों के निजी उर्वरक विक्रेताओं तक डीएपी पहुंचाई जा रही है। फलोदी जिले को 625 मीट्रिक टन आवंटित कृषि विभाग के अनुसार, इस खेप में फलोदी जिले को 625 मीट्रिक टन, जैसलमेर को 425 मीट्रिक टन और जोधपुर जिले को 250 मीट्रिक टन डीएपी आवंटित की गई है। हालांकि, किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन की आवश्यकता के मुकाबले यह मात्रा अभी भी पर्याप्त नहीं है। किसानों के अनुसार, पिछले कई महीनों से बाजार में डीएपी उपलब्ध नहीं थी। खरीफ फसलों की बुवाई शुरू होने के बावजूद खाद न मिलने से किसानों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कृषि विभाग ने बताया कि लगभग 20 दिन पहले केवल 30 मीट्रिक टन डीएपी पहुंची थी। पांच माह बाद यह पहली बार है जब इतनी बड़ी रैक फलोदी आई है। इतनी फसल बुवाई का अनुमान जिले में इस बार लगभग 2 लाख 66 हजार 20 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई का अनुमान है। इसमें मूंगफली 1.20 लाख हेक्टेयर, कपास 1.20 लाख हेक्टेयर, बाजरा 20,120 हेक्टेयर और मूंग व मोठ लगभग 2,900 हेक्टेयर क्षेत्र में बोए जाने की संभावना है। कपास और मूंगफली की बुवाई शुरू हो चुकी है, जबकि अन्य फसलों के लिए किसान मानसून की बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कपास, मूंगफली और बाजरे की बुवाई के समय डीएपी की सर्वाधिक आवश्यकता होती है। इस बार किसानों को बाजार या सरकारी केंद्रों पर डीएपी नहीं मिल पाई थी।