किशनगढ़बास के गांव मोठूकामें स्वामी दयाराम साहिब का दो दिवसीय वार्षिक मेला बुधवार को शुरू हुआ। मेले में देर रात जागरण का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। इस दौरान संतों ने सत्संग की महिमा पर प्रकाश डाला।मेले का शुभारंभ बुधवार सुबह 11 बजे झंडे की रस्म के साथ हुआ। 'सतगुरु सहाय' के उद्घोष के बीच यह रस्म पूरी की गई। मेले में सुबह से ही अजमेर, जयपुर, आगरा, अहमदाबाद, दिल्ली, मंदसौर, भोपाल, ब्यावर, बीकानेर, सूरत, डूंगरगढ़, अलवर, भरतपुर, खैरथल, तिजारा सहित देश के विभिन्न शहरों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। संत लाल भगत और संत मोहन भगत खैरथल ने सत्संग की महिमा का वर्णन किया। इसके अतिरिक्त, संत ललित भगत इस्माइलपुर, सांई बलराम मुंबई, सांई सुगनाराम राजकोट, सांई हरीराम उज्जैन, सांई फकीरा नागपुर, जयेश कुमार बड़ौदा, सांई जीतूराम जयपुर और अशोक घायल अजमेर सहित कई अन्य भजन मंडलियों ने भी सत्संग व प्रवचन प्रस्तुत किए। महाआरती के साथ बहराना साहब की रस्म पूरी की शाम 7 बजे महाआरती का आयोजन किया गया, जिसके बाद रात 9 बजे बहराना साहब की रस्म पूरी की गई। गुरुवार को भी मेले में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन जारी रहेगा।श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेले में भंडारा, निशुल्क चिकित्सा शिविर, स्वच्छ पेयजल और ठहरने की उचित व्यवस्थाएं की गई हैं। ये रहे मौजूद आयोजन को सफल बनाने में सोनू भगतानी, प्रदीप भगतानी, डॉ. युधिष्ठिर पमनानी, डॉ. राजेश पमनानी, श्याम मघनानी, इंदर भगतानी, कमलेश पमनानी, नंदलाल भगतानी, गोरधन भगतानी, मनोज भगतानी, अर्जुनदास भगतानी, चेतन दास, जीवत राम, कैसामल, रूपचंद देवजानी, रघुवीर भगतानी, राम भगतानी, प्रेम भगतानी, मुरलीधर, लालचंद बचानी, किशन चंद, रामोतार और गिर्राज सहित कई सेवादार सक्रिय रूप से जुटे रहे।