देशभर में कोचिंग हब के रूप में पहचान रखने वाले कोटा को एक बार फिर सोशल मीडिया पर निशाना बनाने की कोशिश सामने आई है। पिछले दो-तीन दिनों से एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें छत पर लगे पंखे जालीनुमा ढांचे में कैद दिखाई दे रहे हैं। वीडियो को कोटा के हॉस्टल और कोचिंग संस्थानों से जोड़ते हुए यह दावा किया जा रहा है कि यहां बढ़ते सुसाइड मामलों को रोकने के लिए ऐसे इंतजाम किए गए हैं। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। जिला प्रशासन और हॉस्टल एसोसिएशन दोनों ने इस वीडियो को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया है। हॉस्टल एसोसिएशन का दावा—कोटा को बदनाम करने का कैंपेन कोटा हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मित्तल ने साफ कहा कि वायरल वीडियो का कोटा से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि शहर के किसी भी हॉस्टल या पीजी में इस तरह की जालियां नहीं लगाई गई हैं। मित्तल के अनुसार, वीडियो किसी बड़े हॉल का प्रतीत होता है, जिसे गलत तरीके से कोटा के नाम से प्रचारित किया जा रहा है। उन्होंने इसे कोटा की छवि खराब करने की साजिश करार दिया। जिला प्रशासन ने भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा यह वीडियो पूरी तरह फर्जी है और कोटा में ऐसा कोई स्थान नहीं है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बिना पुष्टि के ऐसे वीडियो शेयर न करें। साथ ही चेतावनी दी गई है कि भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि छात्र और अभिभावक स्वयं कोटा आकर वास्तविक स्थिति देख सकते हैं। नीट से पहले शुरू हुआ वायरल, एडमिशन सीजन पर असर की कोशिश जानकारी के अनुसार, यह वीडियो नीट परीक्षा से ठीक पहले वायरल होना शुरू हुआ और देखते ही देखते बड़े स्तर पर फैल गया। हॉस्टल और कोचिंग से जुड़े लोगों का मानना है कि यह समय एडमिशन का है और कोटा में फिर से छात्रों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में शहर को बदनाम कर छात्रों और अभिभावकों के मन में डर पैदा करने की कोशिश की जा रही है, ताकि वे यहां आने से हिचकें। जेईई मेन के बेहतर परिणामों के बाद कोटा में एक बार फिर छात्रों की आवाजाही बढ़ रही है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम -एंटी-हैंगिंग डिवाइस और बायोमेट्रिक सिस्टम कोटा में छात्र सुरक्षा को लेकर पहले ही कई कदम उठाए जा चुके हैं। अधिकांश हॉस्टल और पीजी में पंखों में एंटी-हैंगिंग डिवाइस लगाए गए हैं। इसके अलावा बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम भी लागू है, जिससे छात्रों के आने-जाने का रिकॉर्ड रखा जाता है और अभिभावकों को जानकारी मिलती रहती है।