मेडिकल कॉलेज में हाल ही हुई प्रसूताओं की मौत के बाद औषधि विभाग और प्रशासन हरकत में आ गया है। प्रसूताओं के इलाज के दौरान इस्तेमाल की गई दवाओं की गुणवत्ता की जांच के लिए टीम ने मेडिकल कॉलेज के स्टोर और संबंधित वार्डों में जांच-पड़ताल की। मेरोपेनम इंजेक्शन को लेकर संदेह जताया गया था। ऐसे में मेरोपेनम के अलावा मरीजों को दिए जाने वाले अन्य महत्वपूर्ण इंजेक्शन और दवाओं की भी लिस्ट सोमवार को तैयार की गई। इनके 8 सैंपल लैब भेजे गए। औषधि नियंत्रक अधिकारी प्रहलाद ने बताया- मेडिकल सुपरिटेंडेंट और गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टरों से परामर्श किया। डॉक्टरों की ओर से जिन संदिग्ध दवाओं और इंजेक्शन की लिस्ट व ओपिनियन सौंपी गई थी। उनके आधार पर सैंपल लेने की प्रक्रिया शुरू की गई। जिन दवाओं पर संदेह है। उनमें से ज्यादातर मरीजों को लगाए भी जा चुके हैं। मेरोपेनम इंजेक्शन पर संदेह ड्रग इंस्पेक्टर संदीप ने बताया- इलाज में इस्तेमाल होने वाला मेरोपेनम इंजेक्शन को लेकर संदेह जताया गया था। इंजेक्शन के सैंपल रविवार को लिए थे। एक ब्रॉड स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक जांच के दौरान स्टोर में एक ही निर्माता कंपनी की ओर से बनाए गए इस इंजेक्शन के दो अलग-अलग बैच उपलब्ध मिले। इंजेक्शन और दवाओं की लिस्ट तैयार की ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया- मेरोपेनम के अलावा मरीजों को दिए जाने वाले अन्य महत्वपूर्ण इंजेक्शन और दवाओं की भी लिस्ट तैयार की गई है, जिनके सैंपल सोमवार को लिए गए हैं। इनमें सेप्ट्रियाक्सोन 500 एमजी और 1g, ट्रेनेक्सामिक इंजेक्शन, सोडियम बाइकार्बोनेट, सेफोपेराजोन-सलबैक्टम इंजेक्शन, लेवेटिरासेटम इंजेक्शन, पैंटोप्राजोल इंजेक्शन,ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के सैंपल लिए गए हैं। इनमें अधिकतर एंटीबायोटिक्स, एसिडिटी और पेप्टिक अल्सर, ब्लिडिंग रोकने और डिलीवरी पेन के लिए उपयोग की जाने वाली दवाएं शामिल हैं। लैब भेजी जाएगी रिपोर्ट औषधि विभाग की ओर से लिए गए सभी सैंपलों को लैब परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दवाओं की गुणवत्ता या मानक में कोई कमी तो नहीं थी। अधिकारियों के अनुसार- रिपोर्ट आने के बाद ही नियमानुसार आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।