नकली नोट बनाने और सप्लाई करने के मामले में फरार चल रहे मास्टरमाइंड रवि कुमार मिश्रा को डूंगरपुर पुलिस ने पंजाब के लुधियाना रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसकी लोकेशन बदलने के बावजूद करीब 1300 किलोमीटर तक तीन दिन पीछा कर पकड़ा। मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ और साइबर सेल के तकनीकी अनुसंधान के आधार पर पुलिस ने तीन अन्य आरोपियों को भी अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया है। गिरोह के दो सदस्य पहले ही 4 लाख 95 हजार 500 रुपए के जाली नोटों के साथ पकड़े जा चुके हैं। एसपी मनीष कुमार ने बताया कि 30 सितंबर को रामसागड़ा थाना क्षेत्र के माड़ा स्कूल ग्राउंड से भावेश खटीक और नयन जोशी को 500-500 रुपए के जाली नोटों के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ में यूपी निवासी रवि कुमार मिश्रा का नाम मास्टरमाइंड के रूप में सामने आया। पुलिस कार्रवाई की भनक लगते ही रवि डूंगरपुर से फरार हो गया था। जिला पुलिस की साइबर सेल और विशेष टीम ने उसकी लोकेशन ट्रेस कर पीछा किया और लुधियाना रेलवे स्टेशन से उसे पकड़ लिया। मास्टरमाइंड से पूछताछ में तीन और गिरफ्तार रवि मिश्रा से पूछताछ के बाद पुलिस ने अलग-अलग राज्यों में टीमें भेजीं। हरियाणा के अंबाला निवासी आनंद राजपूत, कानपुर निवासी आरिफ मोहम्मद उर्फ अंकित और छत्तीसगढ़ निवासी तरुण मालेकर को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार आनंद ने रवि को नोट बनाने के लिए कागज मंगवाने और छपाई की जानकारी दी थी। आरिफ टेलीग्राम पर ‘अंकित पेपर सेलर’ चैनल चलाकर जाली नोट बनाने के लिए कागज उपलब्ध करवाता था। वहीं, तरुण ने मास्टरमाइंड को 500 रुपए के नोटों की पीएसडी फाइलें भेजी थीं। वेब सीरीज ‘फर्जी’ देखकर आया आइडिया पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों को वेब सीरीज ‘फर्जी’ देखकर जाली भारतीय मुद्रा बनाने का आइडिया आया था। पुलिस के अनुसार आनंद राजपूत ने यूट्यूब और फोटोशॉप के जरिए नकली नोट छापने का तरीका सीखा था और चीनी ऑनलाइन कंपनी अलीबाबा से विशेष कागज मंगवाता था। पुलिस गिरोह के नेटवर्क और जाली नोटों की सप्लाई से जुड़े अन्य संपर्कों की जांच कर रही है।