झालावाड़ जिला उपभोक्ता आयोग ने बड़ा फैसला सुनाते हुए महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड और उसके अधिकृत सर्विस सेंटर एवरग्रीन मोटर्स को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी माना है। आयोग ने परिवादी रोशन सिंह गुर्जर को कुल 1.20 लाख रुपए (आर्थिक क्षति, मानसिक संताप और परिवाद खर्च) देने का आदेश दिया है। कंपनी को यह राशि 45 दिनों के भीतर अदा करनी होगी। उपभोक्ता को मिला न्याय आयोग के अध्यक्ष ईश्वरी लाल वर्मा और सदस्य वीरेंद्र सिंह रावत की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद स्पष्ट किया कि सर्विस सेंटर और वाहन निर्माता कंपनी दोनों की ओर से लापरवाही बरती गई। इसी आधार पर एवरग्रीन मोटर्स (कोटा रोड, झालावाड़) और महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड (मुंबई) को संयुक्त रूप से भुगतान के निर्देश दिए गए। क्या है पूरा मामला परिवादी रोशन सिंह गुर्जर, निवासी ग्राम लावासल (तहसील असनावर), ने वर्ष 2010 में महिंद्रा स्कॉर्पियो वाहन खरीदा था। वाहन का एक वर्ष के लिए बीमा भी कराया गया था। बीमा अवधि के दौरान ही वाहन खराब हो गया, जिसके बाद 29 जुलाई 2025 को इसे अधिकृत सर्विस सेंटर एवरग्रीन मोटर्स में मरम्मत के लिए जमा कराया गया। पार्ट बंद बताकर खड़े किए हाथ सर्विस सेंटर ने जांच के बाद बताया कि वाहन का MBFM पार्ट खराब है और उसे बाहर से मंगाना पड़ेगा। लेकिन कुछ दिनों बाद कंपनी ने सूचित किया कि यह पार्ट अब बनना बंद हो चुका है, इसलिए वाहन की मरम्मत संभव नहीं है। इसके चलते वाहन लंबे समय तक वर्कशॉप में ही खराब हालत में पड़ा रहा। वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं दी परिवादी ने कंपनी और सर्विस सेंटर से वैकल्पिक समाधान या अन्य व्यवस्था करने का अनुरोध किया, लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ी। आयोग ने माना ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें और प्रस्तुत साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद माना कि सर्विस सेंटर और कंपनी ने उपभोक्ता के साथ सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार किया है। मुआवजा देने के आदेश आयोग ने आदेश दिया कि परिवादी को: 1 लाख रुपए आर्थिक क्षति के लिए 10 हजार रुपए मानसिक संताप के लिए 10 हजार रुपए परिवाद खर्च के लिए कुल 1.20 लाख रुपए 45 दिनों के भीतर भुगतान किए जाएं।