देश के 23 प्रतिष्ठित आईआईटी संस्थानों में छात्राओं का दाखिला वर्तमान में भी मुख्य रूप से 20 प्रतिशत फीमेल ओनली सुपर न्यूमरेरी सीटों पर ही निर्भर है। जॉइंट इम्प्लीमेंटेशन कमेटी (जेआईसी) की जारी जेईई एडवांस्ड-2026 की 1737 पेजों की विस्तृत व विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में सामने आया है कि वर्ष 2026 में कुल 18,861 विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों में सीटें आवंटित की गईं, जिनमें से जेंडर न्यूट्रल कोटा (सामान्य मेरिट) के आधार पर महज 37 फीमेल कैंडिडेट्स को ही सीट मिल सकी। प्रतिशत के लिहाज से यह आंकड़ा कुल आवंटन का मात्र 0.19% (लगभग 0.2%) ही है। एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा बताते हैं कि रिपोर्ट दर्शाती है कि वर्ष 2021 से 2026 तक के पिछले 6 वर्षों में कुल 20,918 छात्राओं ने आईआईटी में प्रवेश पाया, लेकिन इनमें से जेंडर न्यूट्रल कैटेगरी के तहत जगह बनाने वाली छात्राओं की संख्या महज 133 ही रही। यानी शेष 99.8% छात्राओं का आईआईटी में पहुंचने का सपना सुपर न्यूमरेरी सीटों के भरोसे ही पूरा हो सका। रिपोर्ट में परीक्षा परिणाम, प्रश्नपत्र विश्लेषण, जोन-आधारित प्रदर्शन और श्रेणीवार आंकड़ों का भी गहन विश्लेषण किया गया है। आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि बिना विशेष कोटे के आईआईटी मेरिट में जगह बनाना छात्राओं के लिए अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। 6 साल में जेंडर न्यूट्रल से 133 छात्राएं; 2021 में सबसे कम 5 2026: कुल प्रवेशित 3814 (जेंडर न्यूट्रल- 37, सुपर न्यूमरेरी- 3777) 2025: कुल प्रवेशित 3664 (जेंडर न्यूट्रल- 31, सुपर न्यूमरेरी- 3633) 2024: कुल प्रवेशित 3495 (जेंडर न्यूट्रल- 15, सुपर न्यूमरेरी- 3480) 2023: कुल प्रवेशित 3422 (जेंडर न्यूट्रल- 11, सुपर न्यूमरेरी- 3411) 2022: कुल प्रवेशित 3310 (जेंडर न्यूट्रल- 34, सुपर न्यूमरेरी- 3276) 2021: कुल प्रवेशित 3213 (जेंडर न्यूट्रल- 5, सुपर न्यूमरेरी- 3208) 147 विदेशी छात्रों में से सिर्फ 3 को सीटें; मैथ्स टैलेंट सर्च एग्जाम जरूरी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जेईई एडवांस्ड-2026 में 147 विदेशी विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया। इनमें से दोनों पेपरों (पेपर-1 व पेपर-2) में 131 छात्र शामिल हुए और 10 ने क्वालीफाई किया, लेकिन अंतिम रूप से महज 3 विदेशी विद्यार्थियों को ही आईआईटी में सीटें आवंटित हो पाईं। जेईई व नीट-यूजी एक्सपर्ट देव शर्मा के अनुसार, जेईई एडवांस्ड के मल्टी-कॉन्सेप्चुअल व क्रिटिकल थिंकिंग प्रश्नों को हल करने में छात्राओं की असफलता का मूल कारण गणित विषय के प्रति उनकी स्वाभाविक अरुचि है। इस स्थिति को सुधारने के लिए मिडिल/सेकेंडरी स्तर पर राष्ट्रीय मैथमेटिक्स टैलेंट सर्च एग्जामिनेशन फॉर फीमेल्स शुरू करने की सख्त जरूरत है, जिससे गणित में उनकी रुचि बढ़े और क्रिटिकल थिंकिंग मजबूत हो सके। देव शर्मा, शिक्षा विशेषज्ञ