दीपावली पर शहर को चमकाने के लिए नगर निगम ‘ऑपरेशन क्लीन स्वीप’ और दीवारों के सौंदर्यीकरण के लिए ‘रंग दे गुलाबी’ अभियान चला रहा है, लेकिन कचरा उठाने की व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। शहर में ओपन कचरा डिपो की संख्या 400 से बढ़कर 600 से अधिक हो गई है। इनमें 300 डिपो पर दोपहर 2 बजे तक कचरा पड़ा रहता है, जबकि 78 पर रोज उठाव तक नहीं होता। उपायुक्त, मुख्य सफाई निरीक्षक (सीएसआई) और सफाई निरीक्षक (एसआई) को रोज मौके पर जाकर निगरानी के आदेश हैं, लेकिन नियमित निरीक्षण नहीं हो रहा। नतीजा यह कि मंगलवार को मेयर सुनील कोठारी को खुद सड़क पर रुककर कचरा उठवाना पड़ा। सवाल है कि जब जिम्मेदार अधिकारी निगरानी नहीं करेंगे तो मेयर आखिर कितने डिपो पर जाकर कचरा उठवाएंगे? दोपहर 2:30 बजे कचरे का ढेर मिला, मेयर के फोन पर दौड़े अधिकारी मेयर सुनील कोठारी मंगलवार दोपहर 2:30 बजे विद्याधर नगर के वार्ड-6 में पार्षद कार्यालय के उद्घाटन के लिए पहुंचे थे। मुख्य सड़क पर खड्डा वाले पार्क के पास कचरे का ढेर देखकर उन्होंने गाड़ी रुकवाई। मौके से ही उपायुक्त भगवान सिंह और सीएसआई को फोन किया। गैराज शाखा को सूचना दी और संसाधन भेजकर कचरा उठवाया गया। 11 बजे तक उठना चाहिए कचरा, 300 डिपो पर दोपहर 2 बजे तक ढेर नियमों के अनुसार ओपन डिपो से सुबह 11 बजे तक कचरा उठ जाना चाहिए। इसके बावजूद करीब आधे डिपो पर तय समय के तीन घंटे बाद भी कचरा पड़ा रहता है। 78 डिपो पर दो दिन में एक बार सफाई होती है। रोज फील्ड में जाने के आदेश, उपायुक्त से SI तक निगरानी में चूक उच्च अधिकारियों ने उपायुक्त, सीएसआई और एसआई को प्रतिदिन फील्ड में जाकर सफाई व्यवस्था की निगरानी करने के निर्देश दे रखे हैं। इसके बावजूद त्योहार के समय नियमित निरीक्षण नहीं हो रहा। दीपावली पर दो-दो अभियान; फिर भी ओपन डिपो 400 से बढ़कर 600 हुए; 78 से रोज कचरा ही नहीं उठता जयपुर में 1994 से 2025 तक 12 अलग-अलग चेहरे मेयर की कुर्सी पर बैठे। भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय महापौर रहे। इस दौरान मेयर बदले, निगम के बोर्ड बदले और 2020 में शहर को ग्रेटर व हेरिटेज दो नगर निगमों में भी बांट दिया गया। लेकिन कचरा उठाने की व्यवस्था आज भी सवालों के घेरे में है। शहर में ओपन कचरा डिपो की संख्या 400 से बढ़कर 600 से अधिक हो गई है। इनमें 300 डिपो पर सुबह 11 बजे तक कचरा उठाने का नियम होने के बावजूद दोपहर 2 बजे तक ढेर लगे रहते हैं। सवाल है कि तीन दशक में इतने महापौर बदलने के बाद भी सफाई व्यवस्था को तय समय पर चलाने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने का स्थायी इंतजाम क्यों नहीं हो पाया? 32 साल में 12 मेयर, लेकिन कचरा व्यवस्था नहीं बदली भाजपा के 10, कांग्रेस के 2 मेयर 1994-1999 मोहनलाल गुप्ता, भाजपा से पहले मेयर चुने गए 1999-2001 निर्मला वर्मा, भाजपा की पहली महिला मेयर; कार्यकाल में निधन 2001-2004 शील धाभाई, निर्मला वर्मा के निधन के बाद मेयर बनाया 2004-2008 अशोक परनामी, भाजपा से मेयर बने, फिर विधायक 2008-2009 पंकज जोशी, परनामी विधायक बने तो मेयर पद मिला 2009-2014 ज्योति खंडेलवाल, सीधे चुनाव में जनता ने कांग्रेस उम्मीदवार को चुना 2014-2016 निर्मल नाहटा, भाजपा बोर्ड के शुरुआती दौर में मेयर 2016-2018 अशोक लाहोटी, भाजपा ने नाहटा को हटाया, लाहोटी को मेयर बनाया 2019-2020 विष्णु लाटा, निर्दलीय/कांग्रेस समर्थित, भाजपा से बगावत कर जीते 2020-2021 सौम्या गुर्जर, ग्रेटर की मेयर, भाजपा का बोर्ड 2021-2022 शील धाभाई, भाजपा/कार्यवाहक सौम्या के निलंबन के दौरान 2022-2024/25 सौम्या गुर्जर, भाजपा निलंबन के बाद दोबारा पद पर लौटीं 2020-2024 मुनेश गुर्जर, कांग्रेस हेरिटेज की मेयर 2024-2025 कुसुम यादव, हेरिटेज की कार्यवाहक मेयर