उदयपुर शहर के पास बड़ी ग्राम पंचायत में शुक्रवार को सरपंच पदभार ग्रहण कार्यक्रम के दौरान आस्था और समर्पण का अनूठा दृश्य देखने को मिला। नवनियुक्त सरपंच खुशबू कुंवर ने खुद सरपंच की कुर्सी पर बैठने के बजाय मेवाड़ के आराध्य देव भगवान एकलिंगनाथ की प्रतिमा को विराजमान किया। दरअसल, बड़ी ग्राम पंचायत की नवनियुक्त सरपंच खुशबू कुंवर ने चुनाव में 586 मतों से जीत हासिल की है। खुशबू कुंवर ने चुनाव के दौरान ही संकल्प लिया था कि यदि जनता उन्हें सेवा का अवसर देती है तो सरपंच की कुर्सी पर भगवान एकलिंगनाथ को विराजमान करेंगी। शुक्रवार को पदभार ग्रहण समारोह में खुश्बू कंवर ने इसी संकल्प को पूरा किया। कुर्सी पर भगवान एकलिंगनाथ की प्रतिमा स्थापित कर उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि आने वाले पांच वर्षों तक पंचायत के असली राजा भगवान एकलिंगनाथ ही रहेंगे। वह स्वयं उनके सेवक के रूप में पंचायत की जिम्मेदारी निभाएंगी। खुशबू कुंवर का मानना है कि सरपंच का पद अधिकार जताने के लिए नहीं, बल्कि जनता की सेवा करने का माध्यम है। भगवान एकलिंगनाथ को साक्षी मानकर उन्होंने पंचायत के विकास, खुशहाली और समृद्धि के लिए काम करने का संकल्प लिया। एकलिंगजी-कैलाशपुरी ग्राम पंचायत के सरपंच ने भी यही किया इससे पहले बुधवार को भी एकलिंगजी-कैलाशपुरी ग्राम पंचायत में पदभार ग्रहण समारोह में सरपंच पुष्कर गमेती खुद मुख्य कुर्सी पर बैठने के बजाय हाथ जोड़कर खड़े रहे और पूरे विधि-विधान से मेवाड़ के आराध्य देव भगवान एकलिंगनाथ की छवि को सरपंच की कुर्सी पर आसीन कर दिया। कार्यक्रम में पदभार संभालने के बाद पुष्कर ने कहा- मेवाड़ के प्रतापी शासकों ने कभी खुद को राजा नहीं माना, बल्कि एकलिंगनाथ के रूप में प्रजा की सेवा की। जब कैलाशपुरी में स्वयं एकलिंगनाथ साक्षात विराजमान हैं तो यह कुर्सी भी उन्हीं की है। मैंने चुनाव लड़ने से पहले ही संकल्प ले लिया था कि सरपंच बनने पर कुर्सी पर आराध्य देव ही विराजेंगे। पूरे 5 साल के कार्यकाल में मैं उनके सामने जनता का सेवक बनकर काम करूंगा।