‘सीकर में स्कूल जाने के लिए निकली दो नाबालिग बच्चियां, घर वापस नहीं लौटीं’ ‘दौसा में लाइब्रेरी-कोचिंग जाने का कहकर घर से निकली 2 युवतियां लापता’ ‘अजमेर में मां को खाना देकर लापता हुई 13 साल की स्कूली छात्रा’ राजस्थान में लड़कियों के लापता होने की ये महज 2-3 घटनाएं नहीं। जून से अब तक 156 लड़कियां गायब हुई हैं। कई घर लौट आईं तो किसी को पुलिस ढूंढकर लाई। लेकिन चिंताजनक बात ये है कि इनमें से 47 नाबालिग हैं। घरों से गायब हो रही लड़कियां आखिर जा कहां रही हैं? घर छोड़ने के बाद कहां पहुंचीं और उनके साथ क्या हुआ? दैनिक भास्कर ने इसकी पड़ताल शुरू की। नाबालिग बच्चियों के 5 मामलों में हमने काउंसलिंग करने वाले पुलिस अफसरों और उनके परिवारों से संपर्क किया। उन्होंने जो हकीकत बताई, वो रोंगटे खड़े करने वाली है। ज्यादातर बच्चियां सोशल मीडिया के जरिए अनजान शख्स के कॉन्टैक्ट में आईं। किसी का फोन से संपर्क हुआ। कई बच्चियों को दरिंदगी का शिकार होना पड़ा। पढ़िए संडे बिग स्टोरी… पढ़िए लापता हुई लड़कियों के 5 मामलों की पड़ताल 1. स्नैपचैट पर संपर्क, फिर दूसरे युवक के साथ गुरुग्राम पहुंची; ज्यादती की शिकार चित्तौड़गढ़ में 15 साल की लड़की 1 अक्टूबर को घर से लापता हुई थी। शिकायत मिलने के 6 दिन बाद पुलिस उसे गुरुग्राम (हरियाणा) से सकुशल ढूंढ लाई। नाबालिग ने काउंसलिंग के दौरान पूरी कहानी बताई। मामले में जांच करने वाले ASI ने हमें बताया कि नाबालिग स्नैपचैट पर एक मुस्लिम युवक के संपर्क में आई थी। जो खुद को उत्तराखंड का रहने वाला बताता था। बातचीत बढ़ने के बाद फरवरी 2026 में वह नाबालिग से मिलने चित्तौड़गढ़ भी आया। लेकिन परिवार की सतर्कता के कारण उसे अपने साथ नहीं ले जा सका। इसके बाद उसने नाबालिग को मोबाइल फोन दिया, ताकि दोनों संपर्क में रह सकें। हालांकि परिवार ने फोन अपने पास रख लिया। कुछ समय बाद नाबालिग उससे मिलने के लिए घर से निकल गई। जांच में सामने आया कि अजमेर जाते समय बस में उसकी मुलाकात 25 साल के एक मुस्लिम युवक से हुई। उसने खुद को बिहार का रहने वाला बताया। आरोप है कि वह नाबालिग को गुरुग्राम ले गया और एक पीजी में रखा, जहां उसके साथ ज्यादती की। इस युवक और नाबालिग के संपर्क में आए युवक के बीच का कनेक्शन अभी तक पता नहीं चल पाया है। 2. श्रीगंगानगर: 12 साल की बच्ची घर से निकली, तीन होटल में हुई ज्यादती 22 जून को 12 साल की बच्ची की मां उसके लापता होने की शिकायत लेकर श्रीगंगानगर के एक थाने पहुंची। पड़ताल में सामने आया कि बच्ची 18 जून को इंस्टाग्राम पर संपर्क में आए एक दोस्त से मिलने विजयनगर गई थी। दोस्त से मिलने के बाद वह रात में श्रीगंगानगर बस स्टैंड पहुंची। यहां उसने घर जाने के लिए रिक्शा लिया, लेकिन आरोप है कि रिक्शा चालक उसे घर ले जाने के बजाय एक होटल में ले गया और रातभर उसके साथ ज्यादती की। पुलिस ने रिक्शा चालक को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि बच्ची को इसके बाद दो अन्य होटलों में भी ले जाया गया, जहां उसके साथ ज्यादती किए जाने के आरोप हैं। पुलिस के मुताबिक, जिस होटल में रिक्शा चालक उसे पहली बार ले गया था, वहां उसके साथ सबसे ज्यादा बार दुष्कर्म हुआ। जांच अधिकारी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कैलाश दान के मुताबिक, बच्ची ने 20 से 25 लोगों द्वारा ज्यादती किए जाने की बात बताई थी। उस समय पुलिस ने 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। मामले में तीन होटलों पर जिला प्रशासन ने कार्रवाई की। 3. सिम के जरिए युवक से संपर्क का पता चला, नाबालिग अब तक लापता 8 अक्टूबर को जयपुर जिले में 15 साल की लड़की अचानक घर से गायब हो गई। परिजनों ने तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला तो पुलिस में शिकायत दी। परिवार का कहना है कि उन्होंने नाबालिग को मोबाइल फोन नहीं दिलाया था। हालांकि, जांच के दौरान सामने आया कि नाबालिग मोबाइल फोन के जरिए एक युवक के संपर्क में थी। फोन में इस्तेमाल सिम उसी युवक के नाम पर दर्ज होने की जानकारी मिली। नाबालिग का अब तक पता नहीं चल पाया है कि वो कहां है। इस मामले में यह पता लगाना जरूरी है कि नाबालिग के पास फोन कैसे पहुंचा और युवक से उसका संपर्क कब और कैसे हुआ। 4. लापता होने से पहले घर के फोन पर आया था अनजान कॉल 2 अक्टूबर को गुजरात से अपने परिवार के साथ राजस्थान आई 13 साल की लड़की राजसमंद से लापता हो गई। परिवार के मुताबिक, उसके लापता होने से पहले घर के फोन पर एक अनजान नंबर से कॉल आया था। कॉल करने वाले ने नाबालिग के बारे में पूछा और यह जानने की कोशिश की कि वह घर पर है या नहीं। नाबालिग के पास अपना मोबाइल फोन नहीं था। वह घर के कॉमन फोन का इस्तेमाल करती थी। परिवार को नहीं पता कि कॉल किसने किया था, लेकिन उन्हें शक है कि इस कॉल का बच्ची के लापता होने से कोई संबंध हो सकता है। 5. तीन बार घर से भागी 16 साल की नाबालिग झालावाड़ की 16 साल की लड़की एक ट्रक ड्राइवर के संपर्क में थी, जो अक्सर उसके इलाके में आता-जाता रहता था। 28 सितंबर को नाबालिग घर से निकल गई और उस युवक को फोन किया, जिसके पास जाने के लिए वह निकली थी। युवक ने उसे अपने साथ रखने से इनकार कर दिया। इसके बाद वह दो दिन तक सड़कों पर भटकती रही। एक महिला की सूचना पर पुलिस ने उसे बरामद कर बाल कल्याण समिति (CWC) भेजा, लेकिन वह वहां से भी चली गई। पुलिस ने दोबारा तलाश शुरू की और दो दिन बाद झालावाड़ के ही एक गांव से उसे खोज निकाला। परिवार को सौंपने के अगले दिन वह फिर घर से चली गई। पुलिस ने दोबारा तलाश कर उसे बरामद किया और परिवार के सुपुर्द कर दिया। पाली में सबसे ज्यादा मामले, झालावाड़ दूसरे नंबर पर जिलेवार रिकॉर्ड देखें तो पाली से सबसे ज्यादा 42 मामले मिले। इसके बाद झालावाड़ में 30 और चूरू में 20 मामले सामने आए। चित्तौड़गढ़ में 10, बूंदी में 9, बारां में 6 और राजसमंद में 5 मामले मिले। अजमेर, दौसा और नागौर में 4-4, जबकि अलवर, सवाई माधोपुर और जयपुर शहर (दक्षिण) में 3-3 मामले दर्ज थे। बाकी मामले अन्य जिलों के थे। सोशल मीडिया से संपर्क, फिर ब्रेनवॉश राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (RSCPCR), जयपुर के सदस्य ध्रुव कुमार कविया के मुताबिक, कई मामलों में मोबाइल के जरिए नाबालिग लड़कियां अनजान लोगों के संपर्क में आती हैं। बातचीत के दौरान उन्हें इस तरह प्रभावित किया जाता है कि वे घर छोड़ने को तैयार हो जाती हैं। कम उम्र के कारण उन्हें आगे के खतरे का अंदाजा नहीं होता और वे तस्करी या शोषण का शिकार हो सकती हैं। नाबालिग बच्चियों की काउंसलिंग करने वाली मधु शर्मा बताती हैं कि हाल ही में जयपुर में एक लड़की अपनी चार सहेलियों को बेहतर जिंदगी का झांसा देकर भोपाल ले जाने के लिए निकली। पांचों जयपुर से अजमेर पहुंच गईं, लेकिन एक परिचित को भनक लगने पर उन्हें रोक लिया गया। पूछताछ में सामने आया कि एक लड़की अपने दोस्त से मिलवाने के बहाने उन्हें ले जा रही थी। रिकॉर्ड में बढ़ोतरी: आठ महीने में महिलाओं के अपहरण के 4,171 मामले राजस्थान पुलिस की जनवरी-अगस्त 2026 की अपराध रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल आठ महीनों में महिलाओं के अपहरण की श्रेणी में 4,171 मामले दर्ज हुए। इसी अवधि में 2025 में 3,749 और 2024 में 3,997 मामले दर्ज किए गए थे। 2025 की तुलना में 2026 में 422 मामले अधिक दर्ज हुए। यह करीब 11.3% की बढ़ोतरी है। अगस्त 2026 में अकेले 689 मामले दर्ज हुए, जबकि जुलाई में 560 और अगस्त 2025 में 442 मामले थे।