विधायक ने अनुशंसा की तो अफसरों ने सड़कें कहां बन रही हैं? जमीन किसकी है, सरकारी रुपये खर्च करने की पात्रता है या नहीं...इन सबकी जांच किए बिना ही निर्माण कार्यों की स्वीकृतियां जारी कर दी गईं। ऐसी गड़बड़ी का खुलासा भीलवाड़ा में हुआ है।राजस्थान के सबसे धनी भीलवाड़ा जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) के बजट से शहर की निजी कॉलोनियों के लिए करीब दस करोड़ रुपये की 16 सीसी सड़कें स्वीकृत कर दी गईं। दैनिक भास्कर को इसका पता चला तो इसकी पूरी इन्वेस्टिगेशन की। इसमें खुलासा हुआ कि डीएमएफटी के बजट से केवल खनिज प्रभावित क्षेत्रों में काम कराया जा सकता है। इसके अलावा कहीं और काम नहीं कराया जा सकता है।वहीं इन अफसरों ने तो भूमाफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए निजी कॉलोनियों में ही जो सड़कें जा रही हैं वे ही बनवाई जा रही हैं। नियमानुसार, नगर विकास न्यास और नगर निगम ने विकास शुल्क लिया है तो सड़कें वे ही बनवा सकते हैं। इसमें डीएमएफटी फंड का उपयोग नहीं कर सकते हैं। इसके बावजूद भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी की अनुशंसा पर पहले चरण की 16 सड़कों के लिए 9.98 करोड़ रुपये के प्रस्ताव थे। इस मामले में इसकी इन्वेस्टिगेशन की तो अफसरों ने तुरंत काम रोक दिया। निजी कॉलोनियों के लिए पहले से बनी सड़क को तोड़कर नई बना रहे पटेल नगर से भगवती नगर काम कहां: पटेलनगर सेक्टर से भगवती नगर की तरफ जाने वाली सड़क। स्वीकृति: वर्ष 2025-26 में 12वीं जीसी में पास। तकनीकी रिपोर्ट: लंबाई 500 मीटर व चौड़ाई 3.75 मीटर, लागत 35 लाख। वर्तमान स्थिति: अभी डामर की सड़क बनी है लेकिन कमजोर है। देवविहार से आर्यव्रत कॉलोनी काम कहां: देवविहार से आर्यव्रत कॉलोनी की तरफ जाने वाली सड़क। स्वीकृति: वर्ष 2025-26 में 12वीं गवर्निंग काउंसिल में पास। तकनीकी रिपोर्ट: लंबाई 800 मीटर व चौड़ाई 3.75 मीटर, लागत 70 लाख। वर्तमान स्थिति: निजी कॉलोनी है। अभी कच्ची सड़क बनी हुई है। अंसल सुशांत सिटी काम कहां: अंसल सुशांत सिटी में नई सड़क। स्वीकृति: वर्ष 2025-26 में 12वीं जीसी में पास। तकनीकी रिपोर्ट: एक करोड़ 48 लाख की स्वीकृतियां। वर्तमान स्थिति: निजी कॉलोनी है। सड़कें थीं जो टूट गईं। अब बनीं लेकिन गुणवत्ता खराब निकली। कलेक्टर ने शर्त डाली पर पीडब्ल्यूडी ने अनदेखी की 12वीं गवर्निंग काउंसिल में 9.98 करोड़ के 16 कार्यों की स्वीकृति दी थी। आदेश में है कि विवादग्रस्त, निजी अथवा किसी समाज/वर्ग विशेष के स्थल पर कार्य होने पर कार्यकारी एजेंसी जिम्मेदार रहेगी। इसमें कनक विहार की सीसी सड़क, कमला विहार, रिद्धि-सिद्धि एन्क्लेव के पीछे, मुखर्जी नगर, देवविहार से आर्यव्रत कॉलोनी आदि सड़कें हैं। सड़कों के नाम बदले... इन सड़कों को संपर्क सड़क बताया है। भास्कर ने मौका देखा तो सब निजी कॉलोनियों की सड़कें हैं। अंसल सुशांत सिटी में 1.48 करोड़ से सड़कें बनी हैं। इसे नाम दिया गया कि यहां से एक गांव का रास्ता जाता है जो जुड़ा है। PFA के प्रदेश प्रभारी बाबूलाल जाजू ने कहा राजस्थान में सबसे ज्यादा रुपये भीलवाड़ा के ट्रस्ट में ही करीब तीन हजार करोड़ रुपये जमा हैं। इस बजट से खनिज प्रभावित क्षेत्रों में काम हो सकते हैं। बिंदु 21 व 9बी के प्रावधानों में है कि शहर में इस तरह निजी कॉलोनियों के लिए सड़कें नहीं बनाई जा सकती हैं। "डीएमएफटी की 12वीं व 13वीं गवर्निंग काउंसिल की शिकायत आई है। इनको चेक करवा रहे हैं। काम स्थगित करेंगे। पीडब्ल्यूडी व यूआईटी से इसकी जांच में गलत मिलने पर काम निरस्त कर देंगे।" — जसमीत सिंह संधू, कलेक्टर व डीएमएफटी चेयरमैन "डीएमएफटी से बन रही सड़कें कॉलोनियों के लिए हैं लेकिन ये संपर्क सड़कें हैं। ये रिकॉर्ड में सरकारी हैं। हमारे पास लोग आए थे इसलिए अनुशंसा की। गुणवत्ता की शिकायत जरूर आई थी।" — अशोक कोठारी, विधायक भीलवाड़ा "गवर्निंग काउंसिल में काम स्वीकृत हुए थे। विधायक ने अनुशंसा की थी। ये काम मेरे से पहले के हैं। प्रशासनिक स्वीकृति के बाद तकनीकी रिपोर्ट तैयार की। बाकी एईएन से पूछता हूं। क्या हुआ और कैसे हुआ।" — भैरूलाल रैगर, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी