नगर परिषद चुनाव में मतदान खत्म होते ही परिणाम से पहले बोर्ड बनाने को लेकर राजनीतिक जोड़-तोड़ शुरू हो गई है। वहीं भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने के लिए बाड़ेबंदी कर दी है। भाजपा ने मतदान खत्म होने के करीब 3 घंटे बाद ही अपने प्रत्याशियों को एक जगह जुटा लिया, जबकि कांग्रेस ने करीब 24 घंटे बाद गुरुवार शाम को प्रत्याशियों को बाड़ेबंदी में लिया। दोनों ही पार्टी अपने-अपने प्रत्याशियों को एक साथ रखते हुए चुनाव परिणाम तक उन्हें एकजुट रखने और बोर्ड गठन की रणनीति पर काम करने की कवायद में जुटे हैं। वैसे चुनाव प्रचार के दौरान ही दोनों प्रमुख दलों में बगावत और निर्दलीय प्रत्याशियों को लेकर स्थिति सामने आ चुकी थी। अब मतदान के बाद पार्टी नेतृत्व किसी भी तरह की टूट-फूट से बचने के लिए अपने प्रत्याशियों को एक साथ रख रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार भाजपा ने बुधवार रात अपने प्रत्याशियों को चारभुजाजी मंदिर के पास ले गए और यहां एक सामाजिक भवन में ठहराया है। अगले दिन गुरुवार को सभी को कुंभलगढ़ शिफ्ट किए जाने की जानकारी मिली है। जानकारी मिली है कि कुंभलगढ़ में करीब 15 निकायों के प्रत्याशियों को ठहराया। इधर, कांग्रेस ने गुरुवार शाम अपने प्रत्याशियों को जालोर से बाहर भेज दिया। कांग्रेस के प्रत्याशियों को बाड़मेर की ओर ले गए। सूत्रों के अनुसार इन्हें आगे जैसलमेर ले जाने की तैयारी है। वैसे पार्टी की ओर से प्रत्याशियों की लोकेशन को लेकर गोपनीयता बरती जा रही है। बहुमत के गणित व निर्दलीयों पर नजरें मतदान के बाद अब दोनों ही दल अपने प्रत्याशियों के जीत के समीकरण का आंकलन कर रहे हैं। परिणाम 14 सितंबर को आएगा, पर उससे पूर्व ही बोर्ड गठन को लेकर संभावित समीकरणों पर मंथन शुरू हो गया है। खासकर निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका को लेकर दोनों दल नजर बनाए हुए हैं। जालोर नगर परिषद में 40 वार्ड हैं और बहुमत के लिए 21 पार्षदों का आंकड़ा जरूरी है। भाजपा-कांग्रेस के बीच मुकाबले में निर्दलीय परिणाम के बाद बोर्ड गठन के गणित में बड़ा रोल निभा सकते हैं। हारे तो 14 को, जीतने वालों की वापसी 22 को बाड़ेबंदी में रखे गए प्रत्याशियों को भी परिणाम के हिसाब से जालोर लाने की तैयारी है। जानकारी के अनुसार 14 सितंबर को मतगणना के बाद जो प्रत्याशी चुनाव हार जाएंगे, उन्हें उसी दिन वापस जालोर लाया जाएगा। वहीं जीतने वाले प्रत्याशियों को बोर्ड गठन की प्रक्रिया पूरी होने तक बाड़ेबंदी में रखा जाएगा और उन्हें 22 सितंबर के आसपास जालोर लाने की तैयारी है। यानी परिणाम आने के बाद भी विजेता पार्षदों को करीब एक सप्ताह तक पार्टी की निगरानी में रहना होगा।