इतना तेज ब्लास्ट था कि दोनों भाइयों के शव के टुकड़े 150 मीटर दूर (500 फीट) दूर जाकर गिरे। एक युवक का हाथ मेरे घर के बाड़े में गिरा और फैक्ट्री की छत के 7 किलो वजनी पत्थर तक यहां आकर गिरे। यह कहना है नागौर के बड़ली इलाके में पटाखा फैक्ट्री के पास रहने वाले सीताराम का। उन्होंने कहा- फैक्ट्री में एक के बाद एक 3 धमाके हुए। इसके बाद सभी लोग फैक्ट्री की ओर भागे लेकिन डर गए कि कहीं और धमाके न हो जाएं। वहीं तहसीलदार नर सिंह राम टाक का कहना है कि- बॉडी पार्ट्स में एक पैर अब भी गायब है। प्रारम्भिक जांच में सामने आया है कि पटाखा फैक्ट्री का लाइसेंस रिन्यू नहीं हुआ था। कलेक्टर ने माना है कि फैक्ट्री को लेकर चूक हुई है, इसका सालाना निरीक्षण नहीं हुआ। अब हादसे के बाद लाइसेंस, नवीनीकरण और सुरक्षा इंतजामों की जांच होगी। दरअसल, नागौर में बारूद के गोदाम में गुरुवार सुबह ब्लास्ट हो गया। हादसे में दो भाइयों की मौत हो गई। धमाके के कारण भाइयों की बॉडी के कई टुकड़े हो गए। घटना के करीब डेढ़ घंटे बाद गोदाम के बाहर जमा लोगों ने हंगामा कर दिया। पुलिस ने उन्हें गोदाम के बाहर से हटाने की कोशिश की तो भीड़ ने पथराव कर दिया। इसके बाद लाठीचार्ज कर लोगों को वहां से खदेड़ा गया है। पढ़िए हादसे की ये ग्राउंड रिपोर्ट… नागौर शहर के बाजरवाड़ा इलाके में सन्नाटा पसरा है। दो भाइयों की मौत के बाद परिजन सदमे में हैं। किसी से बात नहीं कर रहे। वहीं एक भाई समय रहते फैक्ट्री से बाहर निकल गया जिससे उसकी जान बच गई। पहले देखिए ये 3 तस्वीरें… अब पढ़िए प्रत्यक्ष्दर्शी ने क्या कहा एक के बाद एक 3 धमाके हुए बड़ली इलाके में रहने वाले सीताराम ने बताया- मैं अपने घर में था। सुबह करीब 9:40 बजे जोरदार धमाका हुआ। सोचा ट्रांसफार्मर में ब्लास्ट हुआ होगा। इसके बाद दूसरा धमाका होते ही मैं समझ गया कि फैक्ट्री में पटाखों का काम होता है तो वहीं कुछ न कुछ हुआ है। फिर एक और धमाका हुआ। बाड़े में आकर गिरा, मांस का टुकड़ा सीताराम ने बताया- इसी दौरान मेरे घर के बाड़े की दीवार के पास मांस का टुकड़ा आकर गिरा, पड़ोसी ने कहा कि एक हाथ भी बाड़े में गिरा है। बाहर मेरे पिता खाट पर बैठे थे। उनसे कुछ दूर एक पत्थर आकर गिरा। मेरे भाई की बेटी बर्तन धो रही थी उसके पास भी पत्थर गिरे। 'लगा और धमाके हो सकते हैं' सीताराम ने बताया- इसके बाद हम पटाखा फैक्ट्री की तरफ दौड़े। देखा तो पूरी फैक्ट्री में से धुआं निकल रहा था। ये धुआं दूर से ही दिखाई दे रहा था। पूरी फैक्ट्री तबाह हो गई थी। सब काला पड़ा था, हमें डर था कि और भी धमाके हो सकते हैं। डरते-डरते पास गए और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस आई बॉडी पार्ट्स को इकट्ठा किया। कलेक्टर बोले- चूक तो हुई है कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने बताया- 1988 में इस स्थान पर 'सोरघर' के नाम से पटाखा निर्माण और भंडारण के लिए जगह आवंटित की गई थी। यहां अधिकतम 15 किलो तक विस्फोटक बनाने की अनुमति होने की जानकारी सामने आई है।इतने लंबे समय से लाइसेंस का नवीनीकरण तो होता रहा, लेकिन मौके पर नियमित फिजिकल निरीक्षण नहीं हुआ। यह प्रशासनिक स्तर पर चूक है, इस स्थान का समय-समय पर निरीक्षण किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जांच में पता करेंगे क्या चल रहा था नागौर तहसीलदार नरसिंह राम टाक ने बताया कि खसरा नंबर 484 गैर मुमकिन सोरघर के नाम से आवंटित है। साल 1988 से ही यहां पटाखा निर्माण और भंडारण की गतिविधि संचालित की जा रही थी। अब जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि लाइसेंस की शर्तों के अनुसार ही पटाखों का निर्माण और भंडारण किया जा रहा था या नहीं। इसके लिए लाइसेंस और उससे जुड़े दस्तावेज की जांच की जाएगी। ------------- यह खबर भी पढ़ें…. राजस्थान-नागौर में बारूद बनाते समय ब्लास्ट, 2 भाइयों की मौत: शवों के टुकड़े बिखरे; हंगामा कर रहे लोगों ने पथराव किया, पुलिस का लाठीचार्ज राजस्थान के नागौर में बारूद के गोदाम में गुरुवार सुबह ब्लास्ट हो गया। हादसे में दो भाइयों की मौत हो गई। धमाके के कारण भाइयों की बॉडी के कई टुकड़े हो गए। पूरी खबर पढ़ें