नागौर में रावण गर्दन घुमाकर अपने भाई कुंभकर्ण और बेटे मेघनाथ को नहीं देख पाया। तकनीकी खामी के चलते यह खास आकर्षण अधूरा रह गया। इससे पहले पुतले को खड़ा करते समय उसका एक पैर टूट गया था, वहीं रावण दहन से पहले ही चिंगारी लगने से पुतला जलने लगा। हालांकि, इससे पहले शिव तांडव की प्रस्तुति और राम दरबार की सजीव झांकी दर्शकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रही। जिला स्टेडियम में मंगलवार शाम विजयादशमी पर पहले कुंभकर्ण, फिर मेघनाथ और आखिर में रावण के पुतले का दहन किया गया। शाम 4:15 बजे हाथी चौक से रवाना हुई रामजी की सवारी विजयादशमी पर भगवान श्रीराम की सवारी शाम सवा 4 बजे हाथी चौक स्थित राम मंदिर से रवाना हुई। सवारी आर्य समाज, नकास गेट और मानासर कॉलेज रोड होते हुए जिला स्टेडियम पहुंची। शाम करीब साढ़े 5 बजे सवारी के स्टेडियम पहुंचते ही मैदान में जय श्रीराम के जयकारे गूंजने लगे। शिव तांडव की प्रस्तुति और राम दरबार की झांकी ने मोहा मन रावण दहन से पहले नगर परिषद की ओर से शिव तांडव की प्रस्तुति और राम दरबार की सजीव झांकी सजाई गई। कलाकारों की शिव तांडव प्रस्तुति ने समां बांध दिया। भगवान श्रीराम के दरबार की आरती के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। वहीं, गोरिल्ला के वेश में घूम रहे कलाकार ने बच्चों सहित दर्शकों का ध्यान खींचा। कार्यक्रम में बच्चों और परिवारों की अच्छी-खासी भीड़ रही। रावण का पुतला खड़ा करते समय गिरा, एक पैर टूटा इस बार रावण का पुतला खड़ा करते समय नीचे गिर गया था, जिससे उसका एक पैर टूट गया। इसके बाद पुतले को दोबारा खड़ा किया गया, लेकिन वह एक तरफ झुका हुआ नजर आया। इस बार रावण का पुतला इस तरह तैयार किया गया था कि वह गर्दन घुमाकर अपने भाई कुंभकर्ण और बेटे मेघनाथ को देख सके। गर्दन घुमाकर भाई-बेटे को नहीं देख सका रावण शाम 6 बजे रावण दहन देखने के लिए शहरवासियों की भीड़ उमड़ पड़ी। हालांकि, तकनीकी खामी के चलते रावण की गर्दन घुमाकर भाई कुंभकर्ण और बेटे मेघनाथ को देखने का खास आकर्षण अधूरा रह गया। रावण दहन से पहले ही पुतले में चिंगारी लग गई और वह जलने लगा। ऐसे में गर्दन घुमाने का विशेष आकर्षण देखने को नहीं मिला। तकनीकी खामी और पुतले के झुकने के कारण रावण दहन के दौरान पहले से तय विशेष आकर्षण नहीं दिख पाया। पहले कुंभकर्ण, फिर मेघनाथ और आखिर में रावण का दहन कार्यक्रम के दौरान सबसे पहले नगर परिषद सभापति संतोष टाक ने बटन दबाकर कुंभकर्ण के पुतले का दहन किया। इसके बाद जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने मेघनाथ के पुतले का दहन किया। अंत में रावण का पुतला जलाया गया। मैदान में हुई आतिशबाजी ने भी लोगों का ध्यान खींचा।