समरावता प्रकरण में मुख्य आरोपी बनाए गए भगत सिंह सेना प्रमुख और देवली-उनियारा उपचुनाव में पूर्व निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीना को सोमवार को बड़ा कानूनी झटका लगा। एससी-एसटी कोर्ट, टोंक ने एक साल पहले नरेश को हाईकोर्ट से मिली जमानत को निरस्त करवाने के लिए पेश किए गए प्रार्थना-पत्र स्वीकार करते हुए जमानत निरस्त दी। अब कानूनी तौर पर नरेश के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो गया। अदालती आदेश के बाद संबंधित थाना पुलिस अब किसी भी समय उनकी गिरफ्तारी कर सकती है। विशेष लोक अभियोजक एडवोकेट रामावतार सोनी ने बताया कि समरावता प्रकरण की एफआईआर में आरोपी नरेश मीणा को हाईकोर्ट से 12 जुलाई 2025 को सशर्त जमानत मिली थी। सशर्त जमानत के बावजूद नरेश मीणा पर पिपलोदी प्रकरण में दर्ज नए प्रकरण व गिरफ्तारी को जमानत की शर्तों का उल्लंघन बताते हुए नगरफोर्ट थाना पुलिस की ओर से न्यायालय में उनके जरिए 11 अगस्त 2025 को कोर्ट में प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया था। अभियोजन पक्ष ने नरेश मीणा की गिरफ्तारी व झालावाड़ में दर्ज नई एफआईआर को भी न्यायालय के समक्ष आधार के रूप में पेश किया गया। सोमवार को दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद विशेष एससी-एसटी कोर्ट ने प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट से मिली जमानत निरस्त कर दी। मामले को समरावता थप्पड़ कांड की न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नरेश मीणा के वकील फतेहराम मीणा ने कहा कि अब हम फैसले को लेकर हाईकोर्ट में अपील दायर करेंगे। 13 नवंबर 2024 को देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र के समरावता गांव में उपचुनाव के दौरान मतदान केंद्र पर नरेश मीना ने तत्कालीन मालपुरा एसडीएम व निर्वाचन अधिकारी को थप्पड़ मार दिया था। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में मामला चर्चा का विषय बना। इसके बाद गांव में तनाव, आगजनी और हिंसा हुई। पुलिस ने नरेश मीना सहित कई लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं, एससी-एसटी एक्ट और अन्य गंभीर आरोपों में प्रकरण दर्ज किया। अगले दिन 14 नवम्बर को समरावता से गिरफ्तार कर 15 नवम्बर को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया था।