राजसमंद जिले के नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर में आगामी अन्नकूट महोत्सव की तैयारियों का पारंपरिक ‘घन की सेवा’ के साथ शुभारंभ हुआ। पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रधान पीठ में यह सेवा तिलकायत महाराज की आज्ञा और युवराज विशाल बावा के निर्देशन में शुरू की गई। सुबह मंगला दर्शन के दौरान ब्राह्मण समाज के सेवकों ने पारंपरिक पदों के भाव के साथ सेवा की शुरुआत की। इसके साथ ही मंदिर में पांच दिवसीय दीपोत्सव और अन्नकूट पर्व की तैयारियां तेज हो गई हैं। मंगला दर्शन के दौरान शुरू हुई घन की सेवा श्रीनाथजी की हवेली में सुबह मंगला दर्शन के दौरान विशेष आध्यात्मिक माहौल रहा। ‘अपने-अपने टोल कहत ब्रज वासिया’ और ‘सुरपति पूजा मेट राज गोवर्धन दिनो’ पदों के भाव के साथ ब्राह्मण समाज के सेवकों ने घन की सेवा का श्रीगणेश किया। इस दौरान अन्नकूट के मुखिया प्रवीण सांचीहर, प्रचारक रमेश सांचीहर, पंड्या परेश नागर, श्रीजी के मुखिया इंद्रवदन गिरनारा, प्रदीप सांचीहर और गिरीश सांचीहर सहित वरिष्ठ सेवकों ने सेवा कार्य शुरू करवाया। लकड़ी के भारी हथौड़ों से कूटी जाती है दाल अन्नकूट के लिए विशेष भोग सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया पर्व से करीब 15 दिन पहले शुरू होती है। इसका पहला चरण ‘घन की सेवा’ कहलाता है। इस परंपरा में मूंग और उड़द की दाल को लकड़ी के बड़े और भारी हथौड़ों से लगातार पीटकर गूंथा जाता है। इस काम में पारंपरिक औजार ‘घन’ का इस्तेमाल होता है। इसी कारण भोग तैयार करने की इस प्रक्रिया को घन की सेवा कहा जाता है। एक महीने पहले शुरू हो जाती हैं दीपोत्सव की तैयारियां श्रीनाथजी मंदिर में पांच दिवसीय दीपोत्सव की तैयारियां करीब एक माह पहले शुरू हो जाती हैं। अन्नकूट पर्व से लगभग 15 दिन पहले प्रभु के लिए विशेष भोग सामग्री बनाने का काम शुरू होता है। घन की सेवा के शुभारंभ के साथ ही मंदिर परिसर में अन्नकूट महोत्सव और दीपोत्सव की तैयारियां तेज हो गई हैं।