शहर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के तहत रविवार को पथ संचलन एवं द्विधारा संगम का आयोजन हुआ। पूर्ण गणवेश में निकले स्वयंसेवकों ने अनुशासन, एकरूपता का परिचय दिया। संचलन के बाद हुई सभा में राजस्थान क्षेत्र प्रचारक निंबाराम ने स्वयंसेवकों को व्यक्ति निर्माण, शाखा की नियमितता और सामाजिक परिवर्तन के विषयों पर मार्गदर्शन दिया। मंच पर बारां विभाग के विभाग संघचालक रमेश मेहता व जिला संघचालक राधेश्याम गर्ग उपस्थित रहे। शहर में द्विधारा संचलन का आयोजन किया गया। एक संचलन झालावाड़ रोड स्थित एक निजी रिसॉर्ट से रवाना हुआ। जबकि दूसरा संचलन मांगरोल बायपास स्थित स्वामी विवेकानंद स्कूल से रवाना हुआ। दोनं संचलन में पूर्ण गणवेशधारी स्वयंसेवक घोष के साथ कदमताल करते हुए विभिन्न मार्गों से होकर धर्मादा चौराहा पहुंचे। यहां दोनों संचलनों का एक ही समय पर संगम हुआ। इसके बाद दोनांे संचलन साथ में अस्पताल रोड़ की ओर रवाना हुए। यहां से कॉलेज तिराहा होते हुए फल सब्जीमंडी पहुंचे। जहां पर कार्यक्रम का समापन हुआ। पथ संचलन 1 में केशव मंडल, प्रताप मंडल एवं दीनदयाल मंडल तथा संचलन 2 में हनुमान मंडल, बालाजी मंडल, विवेकानंद मंडल एवं शिवाजी मंडल के स्वयंसेवकों ने कदम से कदम मिलाए। रचनात्मक कार्यों पर दें ध्यान संघ ने पंच परिवर्तन के तहत सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी भाव और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। विकास के साथ संस्कार, समृद्धि के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व और व्यक्तिगत प्रगति के साथ राष्ट्रहित का भाव भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विभिन्न टिप्पणियों और चुनौतियों के बीच अनावश्यक बहस में उलझने के बजाय रचनात्मक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। सेवा, संवेदना, संस्कार और सकारात्मक आचरण समाज में विश्वास बढ़ाने के प्रभावी माध्यम हैं। शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों का अनुवर्तन जरूरी निंबाराम ने कहा कि शताब्दी वर्ष के दौरान प्रबुद्धजन गोष्ठियों, सामाजिक सद्भाव बैठकों, गृह संपर्क अभियानों, हिंदू सम्मेलनों और युवा कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचने का प्रयास किया गया है। निंबाराम ने कहा कि संघ की प्रार्थना में राष्ट्र को परम वैभव पर ले जाने का संकल्प है। इसका उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग और अंतिम व्यक्ति के विकास सहित राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति है। संघ में दायित्व संगठन की व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए हैं। ये पद-प्रतिष्ठा का माध्यम नहीं ​बल्कि सेवा और समर्पण की जिम्मेदारी है। क्षेत्र प्रचारक निंबाराम ने कहा कि पथ संचलन का उद्देश्य समाज में भय उत्पन्न करना नहीं, बल्कि अनुशासन, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देना है। संगठन की वास्तविक शक्ति स्वयंसेवकों के आचरण और समाज के बीच किए जाने वाले सेवा कार्यों में दिखाई देती है। निंबाराम ने कहा कि संघ का मूल कार्य व्यक्ति निर्माण है और शाखा इसका प्रमुख केंद्र है। नियमित शाखा, खेल, अनुशासन, संस्कार, सेवा और निरंतर अभ्यास से व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक विकास होता है। संघ में पद-प्रतिष्ठा से अधिक दायित्व और समर्पण का महत्व है। उन्होंने मुख्य शिक्षक, कार्यवाह एवं अन्य दायित्ववान कार्यकर्ताओं से शाखाओं में नियमित अभ्यास कराने और प्रत्येक स्वयंसेवक से व्यक्तिगत संपर्क बनाए रखने का आह्वान किया।