नामकरण और उद्घाटन में अनदेखी पर भाजपा में आर-पार शहर भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी अब शोभागपुरा से यूनिवर्सिटी 100 फीट रोड पर नए टावर के नामकरण और लोकार्पण को लेकर पूरी तरह सामने आ गई है। नवनियुक्त मेयर पारस सिंघवी के हाथों रविवार शाम इस टावर के उद्घाटन के बाद शहर भाजपा की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। बड़ी वजह यह है कि जिस टावर का नाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दूसरे सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) के नाम पर तय होने का दावा किया जा रहा था, उसका उद्घाटन आर्किटेक्ट्स टावर के रूप में कर दिया गया और स्थानीय विधायक ताराचंद जैन को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। इसको लेकर विधायक जैन ने नाराजगी व्यक्त की है। टावर समेत कई बड़े काम मेरे आइडिया पर हुए, फिर भी नहीं बुलाया: विधायक इस टावर का नाम आरएसएस के दूसरे सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) के नाम पर रखने का प्रस्ताव महीनों पहले ही पास हो चुका है। इसके बावजूद इसका नाम आर्किटेक्ट्स टावर रखकर लोकार्पण किया गया। मैं आयुक्त से लेकर मुख्यमंत्री तक को पत्र भेजकर टावर का नाम माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) टावर करने की मांग करूंगा। एलिवेटेड रोड, ठोकर चौराहा, शोभागपुरा चौराहा और आरके सर्कल जैसे विकास कार्य मेरी ही देन हैं, फिर भी लोकार्पण में मुझे न बुलाना पार्टी अनुशासन के खिलाफ है। प्रस्ताव पास हो चुका होगा तो स्वर्णिम अक्षरों में लिखवाएंगे गुरुजी का नाम: मेयर मुझे खुद ऐन वक्त पर कार्यक्रम की सूचना मिली थी। मेरी ऐसी कोई मंशा नहीं थी कि समारोह में विधायक जैन नहीं आएं। अगर टावर का नाम गुरुजी के नाम पर था, तो जूडियो सर्किल व आर्किटेक्ट्स टावर के नाम से इसका प्रचार-प्रसार क्यों करते रहे? अगर गुरुजी के नाम पर प्रस्ताव पास हो चुका होगा तो टावर पर गुरुजी का नाम स्वर्णिम अक्षरों में अंकित कर दिया जाएगा। सिंघवी ने ये वादा भी किया कि आगे से वे खुद विधायक जैन को आमंत्रण पत्र भेजकर बुलाएंगे, ताकि विवाद की स्थिति पैदा न हो। 2023 में टिकट कटने के साथ दोनों गुटों में टकराव; बढ़ ही रहा विधायक जैन और मेयर सिंघवी के बीच सियासी खींचतान नई नहीं है। इसकी नींव विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान ही पड़ गई थी। पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के करीबी ताराचंद जैन को जब पार्टी ने शहर से प्रत्याशी बनाया। मजबूत दावेदार माने जा रहे पारस सिंघवी ने उनका खुलकर विरोध किया था। फिर डेढ़ साल पहले जब गजपाल सिंह राठौड़ को शहर जिलाध्यक्ष बनाया गया तो सिंघवी को महामंत्री की जिम्मेदारी मिली। राठौड़ की कार्यकारिणी में कटारिया और विधायक जैन के करीबियों को दरकिनार कर दिया गया, जिससे दोनों गुटों का टकराव और बढ़ गया। गुटबाजी का यह खेल लगातार बढ़ता गया। बीते दिनों उदयपुर फाइल्स प्रकरण में शहर भाजपा के ही एक पदाधिकारी की अंदरखाने घेराबंदी करने के आरोप लगे तो उसका ठीकरा भी अंदरखाने कटारिया गुट के ही एक बड़े नेता के सिर फोड़ दिया गया। इसकी गूंज पूरे राजस्थान के सियासी गलियारों में सुनाई दी। हाल ही सिंघवी को मेयर के पद पर बैठाने में जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह की मुख्य भूमिका रही। इस पूरी सियासी बिसात पर कटारिया समर्थक किसी भी नेता को तवज्जो न देकर उन्हें सियासी रूप से हाशिए पर धकेलने का काम लगातार जारी रहा, जो अब टावर के लोकार्पण पर खुलेआम सड़क पर आ गया है।