पाली में बुलेट ने आगे चल रही बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में बाइक सवार किसान उछलकर बबूल के पेड़ पर गिर गया। बबूल की कांटेदार लकड़ी किसान की गर्दन के आरपार हो गई। आसपास के लोगों ने घायल किसान को बांगड़ हॉस्पिटल पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने 2 घंटे तक ऑपरेशन कर गर्दन में फंसी 13 CM लंबी लकड़ी निकाल कर किसान की जान बचाई। हादसा बुधवार सुबह 11:30 बजे मारवाड़ जंक्शन उपखंड क्षेत्र के भांगेसर-खामल गांव का है। सुरायता निवासी किसान मदनलाल (50) पुत्र देवाराम पत्नी ढगलीदेवी (45) के साथ बाइक से पाली जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में बुलेट ने टक्कर मार दी। पीछे से बुलेट सवार ने बाइक को मारी टक्कर किसान मदनलाल अपनी पत्नी ढगलीदेवी के साथ पुनायता के पास खेत की रखवाली करने जा रहे थे। घर से करीब 15 किमी दूर भांगेसर-खामल गांव के बीच सुबह 11:30 बजे पीछे से आ रहे बुलेट सवार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। मदनलाल बाइक से उछलकर सड़क किनारे लगे बबूल के सूखे पेड़ पर जा गिरे। पेड़ की कांटेदार टहनी उनकी गर्दन में घुस गई। दो घंटे चला ऑपरेशन हादसे में गंभीर रूप से घायल मदनलाल को वहां से गुजर रहे पिकअप चालक ने अपनी गाड़ी से बांगड़ हॉस्पिटल पहुंचाया। जहां जरूरी जांच के बाद सर्जिकल विभाग की टीम ने करीब 2 घंटे तक ऑपरेशन करके गर्दन में फंसी करीब 13 इंच लंबी लकड़ी को बाहर निकाला। गर्दन से गुजरने वाली दिमाग की नस को नुकसान नहीं हुआ डॉ. मनीष चौधर ने बताया- बुधवार दोपहर करीब 1 बजे मरीज को ट्रोमा वार्ड में लाया गया था। लकड़ी उसकी गर्दन के आर-पार हो गई थी। जरूरी जांच के बाद बुधवार शाम करीब 6 बजे ऑपरेशन शुरू किया गया, जो करीब 2 घंटे चला। उन्होंने बताया- ऑपरेशन सफल रहा और मरीज की हालत अब ठीक है। गनीमत रही कि गर्दन से गुजरने वाली दिमाग की नस को नुकसान नहीं पहुंचा। अगर नस डैमेज हो जाती तो मरीज को ज्यादा नुकसान हो सकता था। खेत की रखवाली करने जा रहे थे मदनलाल घायल मदनलाल के भाई के पोते दिलीप ने बताया- दादा-दादी बाइक से पाली की तरफ जा रहे थे। मैं टेम्पो में सामान लेकर उनके पीछे आ रहा था। दादा मदनलाल पाली के पुनायता के पास एक खेत की रखवाली का काम करते हैं। वे उसी खेत पर जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में भांगेसर-खामल गांव के बीच हादसा हो गया। 9 डॉक्टरों की टीम ने 2 घंटे में गर्दन से लकड़ी निकाली डॉ. अनिल कुमार विश्नोई ने बताया कि लकड़ी की लंबाई और कांटों के कारण ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण था। ऑपरेशन में सर्जिकल टीम के डॉ. दिनेश सोलंकी, डॉ. अशोक विश्नोई, डॉ. भानु प्रताप, डॉ. नागेंद्र सिंह और डॉ. राहुल गुर्जर सहित अन्य चिकित्सा कर्मियों ने सहयोग किया। एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. श्वेता बराड़िया और डॉ. आंचल गजेंद्र ने मरीज को एनेस्थीसिया देने के साथ उसकी निगरानी की। न्यूरोसर्जन डॉ. सुरेश कुमावत और ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. ए.एन. योगी का भी सहयोग रहा। डॉक्टरों ने 2 घंटे तक ऑपरेशन करके लकड़ी निकाली।