ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही की जिम्मेदारी संभालने वाले रेलकर्मियों की शराब जांच में चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। सितंबर में ज्यूरिख से दिल्ली की एयर इंडिया की उड़ान के एक पायलट के शराब जांच में पकड़े जाने पर उसे निलंबित किया गया था। अब उत्तर पश्चिम रेलवे में भी ट्रेन संचालन से जुड़े कर्मचारियों की शराब जांच के बड़े आंकड़े सामने आए हैं। वर्ष 2025 से अक्टूबर 2026 की शुरुआत तक शराब जांच में कुल 239 मामले दर्ज हुए। इनमें 185 मामले ड्यूटी शुरू होने से पहले की जांच में सामने आए। यानी 77 प्रतिशत ड्यूटी संभालने से पहले के हैं। इनमें लोको पायलट व सहायक लोको पायलट की विभिन्न श्रेणियों के 141 मामले शामिल हैं। सबसे ज्यादा 121 मामले जयपुर मंडल में दर्ज हुए। ये जानकारी नीमच निवासी चंद्रशेखर गौड़ द्वारा मांगे गए सूचना के अधिकार में सामने आई है। रेलवे में कर्मचारियों को ड्यूटी शुरू करने से पहले व खत्म होने पर ब्रेथ एनालाइजर मशीन में जांच करानी होती है। उत्तर पश्चिम रेलवे के 4 मंडल जयपुर, अजमेर, जोधपुर और बीकानेर हैं। इसका कार्यक्षेत्र मुख्य रूप से राजस्थान में है। हरियाणा, पंजाब और गुजरात के कुछ रेलमार्ग भी इसके अधीन हैं। नियम : ड्यूटी शुरू होने से आठ घंटे पहले शराब पीने पर रोक है, बर्खास्तगी तक संभव ड्यूटी शुरू करने से पहले की जांच को ‘साइन ऑन' कहा जाता है। 2025 में इस जांच में असफलता के 100 मामले दर्ज हुए। 2026 में अक्टूबर की शुरुआत तक ऐसे 85 मामले थे। दोनों अवधियों में यह संख्या 185 हो गई। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये जांच, ड्यूटी संभालने से पहले की जाती है। ऐसे में कर्मचारियों की शराब जांच में असफलता सीधे रेल सुरक्षा से जुड़ा विषय है। ड्यूटी खत्म होने के समय की जांच में भी 42 मामले दर्ज हुए। इनमें 2025 के 28 और 2026 के 14 मामले शामिल हैं। इसके अलावा 12 प्रविष्टियां अलग टेस्ट श्रेणी में दर्ज हैं। ये जयपुर मंडल के वरिष्ठ सहायक लोको पायलट की श्रेणी से संबंधित हैं। लोको पायलट की श्रेणियों में 141 मामले शराब जांच में असफलता के कुल मामलों में 141 लोको पायलट और सहायक लोको पायलट की विभिन्न श्रेणियों से जुड़े हैं। इनमें मालगाड़ी, मेल-एक्सप्रेस और यात्री ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट के साथ सहायक और वरिष्ठ सहायक लोको पायलट की श्रेणियां शामिल हैं। ट्रेन मैनेजर की विभिन्न श्रेणियों में भी 98 मामले दर्ज हुए हैं। वर्ष 2025 के 128 और वर्ष 2026 में अक्टूबर की शुरुआत तक 111 मामले दर्ज हैं। छोटी सी अनदेखी हादसे का कारण बन सकती है नियम अनुसार ड्यूटी शुरू होने से 8 घंटे पहले व ड्यूटी के दौरान शराब पीने पर रोक है। ऐसा होने पर ड्यूटी से रोकने व शराब की मात्रा के अनुसार विभागीय दंड के प्रावधान हैं। रेल संचालन में छोटी चूक भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए जांच में असफलता के इतने मामले सामने आना रेल सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर है। बता दें मालगाड़ी, मेल-एक्सप्रेस और यात्री ट्रेनों के लोको पायलट के साथ सहायक और वरिष्ठ सहायक लोको पायलट की श्रेणियां भी शामिल हैं। लोको पायलट्स पर अधिक मामले चारों मंडल; शराब जांच में असफलता के मामले साइन ऑन के 185 मामले, समाप्ति पर 42 केस