प्रदेश के सरकारी हॉस्पिटल में मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में होने वाला गरीबों का मुफ्त इलाज थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA) की पेचीदगियों में उलझ गया है। कोटा मेडिकल कॉलेज के नए हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर टीपीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा कि ये अव्यावहारिक और मरीजों की निजता का उल्लंघन है। बेवजह के नियम थोपे जा रहे हैं। साल 2024 में 20.90 करोड़ रुपए के दावे बुक हुए, वहीं, ये साल 2025 में बढ़कर 23.24 करोड़ पहुंच गए, लेकिन क्लेम रिजेक्ट करने की दर बढ़ी है। अधीक्षक डॉ. शर्मा ने आग्रह किया है कि वर्ष 2025 में तकनीकी कारणों से रिजेक्ट सभी क्लेम की अपील सुनी जाए, ताकि अस्पताल को वित्तीय नुकसान नहीं हो। सबूतों के साथ सरकार को भेजी रिपोर्ट में 30 मामलों का जिक्र अधीक्षक की ओर से चिकित्सा शिक्षा विभाग को लिखे पत्र में 30 टीआईडी(TID) का जिक्र है। सभी के साथ बतौर सबूत टीआईडी है। गलत पैकेज कोड के कारण रिजेक्ट- (T22122544436598, T12112543530446, T31102543246827) ये टीआईडी उन दावों के हैं, जिन्हें सही पैकेज छपे होने के बावजूद गलत कोड बताकर खारिज किया। हॉस्पिटल का तर्क है कि डायग्नोसिस के अनुसार पैकेज सही थे, फिर भी रिजेक्ट किए गए। बायोप्सी रिपोर्ट के अभाव में रिजेक्ट (T26112543847419, T24112543782273, T09112543442034) ये टीआईडी बायोप्सी की रसीद अटैच होने के बावजूद फाइनल रिपोर्ट न होने से रिजेक्ट किए हैं। रिपोर्ट में 10-15 दिन लगते हैं, लेकिन टीपीए इसे तुरंत अनिवार्य मान रहा है। निजी अंगों के फोटो न होने पर रिजेक्ट (T27112543854286, T14122544251845, T23122544453066) ये उन सर्जरी के हैं, जिनमें मरीज के प्राइवेट पार्ट के फोटो मांगे। हॉस्पिटल इसे निजता का उल्लंघन मानता है। इनवॉइस और बारकोड की समस्या (T14122544250982, T05012644721722, T21112543731886) ये टीआईडी अस्थिरोग विभाग में इस्तेमाल सामान के अलग-अलग बिल और बारकोड न होने से रिजेक्ट हुए। थोक खरीदी का अलग-अलग बिल संभव नहीं। टांके के फोटो (T23122544461527, T02112543283927, T22112543751961) फोटो के लिए मरीज की ड्रेसिंग खोलने की मांग की गई। हॉस्पिटल इसे संक्रमण के खतरे के कारण मरीज के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ मानता है। एक से अधिक बीमारियां हैं तो एक का क्लेम या पूरा क्लेम ही रिजेक्ट कर देता है टीपीए अस्थि रोग विभाग में कलेक्टर की ओर से स्वीकृत आयुष्मान कार्डों पर किए गए ऑपरेशनों को भी टीपीए रिजेक्ट कर रहा है। किसी मरीज को एक से अधिक बीमारियां हैं (जैसे सांस की बीमारी के साथ टीबी), तो टीपीए एक ही बीमारी का क्लेम देता है या पूरा क्लेम ही रिजेक्ट कर देता है। मरीज 24 घंटे से कम समय के लिए भर्ती रहता है, तो डे-वाइज पैकेज के क्लेम रिजेक्ट किए जा रहे हैं, जबकि पहले 12 घंटे से अधिक रुकने पर पूरे दिन का क्लेम मिलता था। मेडिसिन और श्वास रोग विभाग में फिल्म उपलब्ध कराने के बावजूद लिखित एक्स-रे रिपोर्ट न होने पर दावे खारिज हो रहे हैं। 4 मामलों से समझिए सिस्टम की संवेदनहीनता 1. जच्चा-बच्चा अलग-अलग भर्ती, एक साथ फोटो की डिमांड : शिशु रोग विभाग में यदि कोई नवजात गंभीर हालत में एनआईसीयू (NICU) में भर्ती है और उसकी मां का इलाज दूसरे वार्ड में चल रहा है तो टीपीए कहता है कि बच्चे की फोटो मां के साथ ही होनी चाहिए। हॉस्पिटल का कहना है कि गंभीर स्थिति में बच्चे को वेंटिलेटर या मशीनों से हटाकर फोटो खिंचवाना संभव नहीं होता, लेकिन इस आधार पर क्लेम रिजेक्ट किए जा रहे हैं। 2.निजता का भी ध्यान नहीं, प्राइवेट पार्ट के फोटो मांगे जा रहे- सर्जरी विभाग के कई केस सिर्फ इसलिए रिजेक्ट कर दिए गए क्योंकि उनमें मरीज के प्राइवेट पार्ट के फोटो अटैच नहीं थे। हॉस्पिटल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मरीज की निजता के लिहाज से ऐसे फोटो उपलब्ध कराना उचित नहीं है, फिर भी टीपीए इसे अनिवार्य बताकर क्लेम रोक रहा है। 3. बायोप्सी रिपोर्ट का इंतजार नहीं कर रहा टीपीए -कैंसर व अन्य सर्जरी के मामलों में बायोप्सी की रिपोर्ट आने में 10 से 15 दिन का समय लगता है। पहले केवल रसीद के आधार पर क्लेम अप्रूव हो जाते थे, लेकिन अब रिपोर्ट के अभाव में 30-35 प्रतिशत दावे सीधे खारिज कर रहा है। जबकि, बायोप्सी की रिपोर्ट आने में समय लगना स्वाभाविक प्रक्रिया है। 4. डिस्चार्ज के समय टांकों के सबूत मांगते हैं-अस्थि रोग विभाग में ऑपरेशन के बाद जब मरीज डिस्चार्ज होता है, तो टीपीए टांकों के फोटो मांगता है। इसके लिए मरीज की ड्रेसिंग खोलनी पड़ती है, जिससे संक्रमण का खतरा रहता है। हॉस्पिटल का तर्क है कि मरीज के ऑपरेशन के दौरान लिए गए घाव के फोटो को ही आधार माना जाना चाहिए।