डिप्टी सीएम प्रेमचन्द बैरवा के नाम से फर्जी कॉल कर अफसरों को धमकाने के मामले में जेएलएन अस्पताल के नर्सिंग ऑफिसर को पुलिस ने जांच के बाद दोषी माना है। पुलिस ने नोटिस जारी कर अभियोजन स्वीकृति के लिए फाइल कोर्ट भेजी है। वहीं दूसरी ओर आरोपी नर्सिंग ऑफिसर पुष्पेन्द्र पारीक ने ड्यूटी से नदारद रहने का कारण बीमारी बताया और गत सप्ताह ड्यूटी भी ज्वॉइन कर ली। वहीं डिप्टी सीएम के ओएसडी की ओर से विभागीय जांच के लिए लिखे जाने के एक माह बाद भी कोई विभागीय जांच शुरू नहीं की गई है। बता दें कि डिप्टी सीएम के ओएसडी ने 25 जून को हैल्थ डिपार्टमेंट के प्रमुख शासन सचिव को विभागीय कार्रवाई व कोतवाली थाना पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के लिए शिकायत दी थी। लेकिन इस मामले में कोई विभागीय जांच हैल्थ डिपार्टमेंट की ओर से शुरू नहीं की गई है। केवल ड्यूटी से नदारद की जांच-डॉ. खरे इस सम्बन्ध में बात करने पर जेएलएन अस्पताल के अधीक्षक अरविन्द खरे ने कहा कि कॉल कर धमकाने के मामले में पुलिस में मामला दर्ज है और कोई विभागीय जांच नहीं की जा रही। लेकिन जिन दिनों में बिना अनुमति ड्यूटी से नदारद रहा, इस मामले में जांच डॉ. रमाकान्त दीक्षित को सौंपी गई है। अवकाश को लेकर रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट को भेजी है फाइल-सीआई इस मामले में कोतवाली पुलिस थाना प्रभारी रामेश्वरी देवी ने कहा कि आईटी एक्ट (सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम) के मामले में जांच के बाद पुलिस ने आरोपी माना है और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की तहत नोटिस जारी किया। 7 साल या उससे कम सजा वाला मामला है, अभियोजन स्वीकृति के लिए कोर्ट को फाइल भेजी है। पुलिस की जांच रिपोर्ट (चार्जशीट) के बाद कोर्ट में मामला चलेगा। नर्सिंग कर्मी के खिलाफ के दर्ज कराया था मामला उप मुख्यमंत्री के OSD भगवत सिंह राठौड़ ने 25 जून को शिकायत भेजकर आरोपी नर्सिंग कर्मी के खिलाफ कोतवाली पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया था कि अजमेर के आदर्श नगर निवासी नर्सिंग कर्मचारी पुष्पेंद्र पारीक ने गंभीर आपराधिक कृत्य किया है। आरोपी ने अपने मोबाइल फोन की कॉलर आईडी (जैसे ट्रूकॉलर) पर अपना नाम इस तरह सेट कर लिया था कि फोन करने पर उसका मोबाइल नंबर उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के नाम से दिखे। शिकायत के अनुसार- आरोपी पुष्पेंद्र ने खुद को उप मुख्यमंत्री बताते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय के विशिष्ट सहायक बलवंत लिगरी को फोन किया। उसने फोन पर निर्देश दिया कि कर्मचारी पुष्पेंद्र पारीक का तत्काल प्रभाव से जवाहर लाल नेहरू (JLN) चिकित्सालय, अजमेर में ट्रांसफर किया जाए। इसके बाद उसने जवाहर लाल नेहरू हॉस्पिटल, अजमेर के अधीक्षक डॉ. अरविंद खरे को भी फोन किया। वहां भी उसने खुद को उपमुख्यमंत्री बताते हुए पुष्पेंद्र पारीक को मनचाहा कार्य आवंटित करने के लिए प्रभावित करने का प्रयास किया। शिकायत में बताया कि आरोपी न तो उप मुख्यमंत्री है और न ही उसे उप मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से किसी भी प्रकार का निर्देश जारी करने का कोई अधिकार प्राप्त है। इसके बावजूद उसने जानबूझकर और दुर्भावनापूर्वक खुद को उप मुख्यमंत्री के रूप में प्रस्तुत किया, ताकि सरकारी अधिकारियों को भ्रमित कर प्रशासनिक कामों को प्रभावित किया जा सकें। यह कृत्य न केवल उप मुख्यमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है, बल्कि शासन-प्रशासन में अनुचित हस्तक्षेप, धोखाधड़ी, प्रतिरूपण (Impersonation) और लोक विश्वास को प्रभावित करने वाला एक गंभीर अपराध है। इस पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। --- यह खबरें भी पढ़िए… डिप्टी-सीएम बैरवा के नाम से कॉल कर अफसर को धमकाया:दो बार खुद का ट्रांसफर करवाया, सरकारी अस्पताल के नर्सिंग ऑफिसर का कारनामा अजमेर में डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा के नाम से फर्जी कॉल कर ट्रांसफर करवाने का मामला सामने आया है। सरकारी हॉस्पिटल के एक नर्सिंग ऑफिसर ने वॉइस मॉडिफिकेशन एप के जरिए आवाज, नंबर और प्रोफाइल बदलकर अपना तबादला करवा लिया। (पढ़ें पूरी खबर) डिप्टी-सीएम बनकर ट्रांसफर कराने वाले नर्सिंग ऑफिसर पर FIR:ओएसडी की शिकायत पर कार्रवाई, आरोपी ने मनचाही जगह पर ली थी पोस्टिंग अजमेर में डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा के नाम से फर्जी कॉल कर ट्रांसफर करवाने नर्सिंग ऑफिसर पुष्पेंद्र पारीक मामला दर्ज हुआ है। कोतवाली थाना पुलिस को डिप्टी सीएम के ओएसडी भगवत सिंह राठौड़ (RAS) ने शिकायत दी है। पूरी खबर पढें