राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर जिले के ऋषभदेव थाना क्षेत्र में कथित अवैध एवं जबरन धर्मांतरण मामले में गिरफ्तार 13 आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। जस्टिस सुनील बेनीवाल की पीठ ने आरोपियों की भूमिका को प्रथमदृष्टया एक संगठित सिंडिकेट के रूप में पाया। कोर्ट ने माना कि जांच जारी होने और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका के चलते इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं है। अंतरराज्यीय नेटवर्क की आशंका यह मामला बीएनस की अलग धाराओं और राजस्थान गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2025 की धारा 3/5(1) के तहत दर्ज किया गया है। जांच में छत्तीसगढ़ के अनुग्रह ज्योति संस्थान और उदयपुर के अपम एंड शलोमी वेलफेयर सोसाइटी के बीच संबंध सामने आए हैं। आरोप है कि इनके तार पंजाब के अंकुर नरुला से भी जुड़े हैं, जिससे एक अंतरराज्यीय नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है। केस डायरी में संदिग्ध मैसेज और पैसों के लेने-देन के प्रमाण जांच में मुख्य आरोपी अमित हरीश ने पिछले चार वर्षों में 150 से 200 लोगों के धर्मांतरण का दावा किया है। केस डायरी में संदिग्ध मैसेज और पैसों के लेन-देन के प्रमाण भी मिले हैं। आरोप है कि कुछ आरोपी संस्थाओं के माध्यम से शिविर आयोजित करने के लिए भिलाई से उदयपुर आए थे, जबकि स्थानीय आरोपियों पर टेंट और स्थल की व्यवस्था करने, सामग्री वितरित करने और ग्रामीणों को शिविरों में लाने की भूमिका का आरोप है। मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की जा रही है, जिससे आगे और तथ्य सामने आने की संभावना है। कैंप के लिए उदयपुर आए थे अमित कुमार, पलाश गुलहानी व आशीष मसीह (छत्तीसगढ़), संस्था के जरिए धर्म परिवर्तन की गतिविधियों और कैंप का आयोजन करने हेतु भिलाई से उदयपुर आए थे। हरिश (उदयपुर) उदयपुर की संस्था का संचालन तथा पंजाब के अंकुर नरुला से धर्मांतरण व पैसों के लेनदेन का आदान-प्रदान। यह अंकुर नरुला जो कि विदेशी संस्थानों से और व्यक्तियों से जुड़ा हुआ है और यह अमित का गुरु है यह स्थानीय लोगों जो की अभी वर्तमान मे पादरी बन चुके हैं और ईसाई धर्म को स्वीकार कर चुके है। इनमें से प्रभुलाल, सोहनलाल, बाबूलाल व अन्य 6 स्थानीय आरोपी, टेंट-ज़मीन की व्यवस्था करना, सामग्री बांटना व स्थानीय आदिवासियों/ग्रामीणों को शिविर में बुलाकर धर्मांतरण के लिए उकसाना पाया गया है।