आबकारी विभाग उन शराब लाइसेंस की छंटनी कर रहा है, जिनमें आवेदक गरीब हैं। साथ ही किसी अन्य व्यक्ति और शराब माफिया का मोबाइल नंबर ठेके से लिंक है। भास्कर एप के खुलासे के बाद विभाग ने यह एक्शन लिया है। दरअसल, भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि अलवर में गरीबों के नाम पर शराब ठेके लिए जा रहे हैं। उनके नाम पर करोंड़ों रुपए का जुर्माने का नोटिस आ रहा है। ये पूरा खेल शराब ठेकों के मालिकों और आबकारी के अधिकारियों की मिलिभगत से चल रहा है। नियमों के मुताबिक, जो शराब की दुकान आबकारी विभाग से तय माल (कोटा) नहीं उठाती, उसे 7 दिन के भीतर बंद करना होता है। लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत से इन दुकानों को पूरे साल चलने दिया गया। अब आबकारी विभाग ने तय किया है कि दुकानों के लाइसेंस और बैंक खातों में जिनके मोबाइल नंबर हैं, उनसे रिकवरी होगी। अधिकतर केस में मोबाइल नंबर शराब के ठेके चलाने वालों के हैं। अब इनसे रिकवरी हो सकती है। अकेले अलवर में 216 केस में करीब 160 करोड़ रुपए बाकी हैं। पूरे प्रदेश में कई हजार करोड़ की रिकवरी होनी है। आबकारी विभाग ने अब इस लूपहोल को भरने के लिए डिजिटल रास्ता निकाला है। अब मोबाइल नंबर और बैंक खातों की कड़ियों को जोड़कर असली माफिया की पहचान की जाएगी। रिकवरी सीधे उसी की संपत्ति कुर्क करके की जाएगी। दरअसल, भास्कर एप ने अपनी खबर ‘महिला की इनकम 5 हजार, 2 करोड़ का नोटिस आया:गरीबों के नाम पर करोड़ों के शराब ठेके, माफिया ने धोखे से लिए आधार-अकाउंट नंबर’ में खुलासा किया था कि अलवर समेत पूरे राजस्थान में शराब ठेकेदार गरीबों को 10 से 15 हजार रुपए का लालच देकर लाइसेंस ले रहे हैं। राजस्थान के कई शहरों में शराब माफिया ने आबकारी विभाग को ऐसे ही ठगा है। पूरे राजस्थान में विभाग का ऐसे ठेकेदारों पर करीब 160 करोड़ रुपए बकाया हो गया है। अलवर में ऐसी दुकानों से अकेले वित्तीय वर्ष 2024-25 में ही विभाग को करीब 50 से 60 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है, जिसकी रिकवरी आज भी विभाग नहीं कर पाया है। (पूरी खबर पढ़ें) शराब ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए धांधली नियम के अनुसार- गरीबों की दुकान से तय समय में शराब नहीं बिकने पर 7 दिन में इनका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाना चाहिए था। इसके बावजूद अलवर के इन पीड़ितों का लाइसेंस साल भर 2024-25 में चालू रखा। मार्च 2025 में इनका लाइसेंस निरस्त किया गया। ऐसे में सीधे तौर पर इन्हें फंसाने वाले शराब ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया गया। अलवर में शराब ठेकेदार और अफसरों की मिलीभगत से 60 करोड़ का घाटा सूत्रों के अनुसार- शराब ठेकेदार गरीब लोगों के नाम पर ली दुकान पर अपना माल बेचकर कम समय में मोटा मुनाफा कमाते हैं। उनके इस काले कारनामे में आबकारी विभाग के कई अफसरों की मिलीभगत होना भी सामने आया है। सरकार के दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए आबकारी अधिकारी ने सालभर (2024-2025) 'मिलीभगत का खेल' खेला और डिफॉल्टर शराब दुकानों को समय पर निरस्त करने के बजाय वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन का इंतजार किया। इस पूरे खेल में न केवल राजस्व को भारी नुकसान हुआ है, बल्कि उन्हीं डिफॉल्टर ठेकेदारों को नए नामों से दोबारा दुकानें भी आवंटित कर दी गई हैं। इसका नतीजा रहा कि अलवर जिला शराब के ठेकों से प्राप्त रेवेन्यू में सबसे पीछे चला गया। 2024-2025 में करीब 50 से 60 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। ये वो दुकानें हैं जिनको गरीबों के नाम आवंटित कराया गया।