तीन-चार साल की बच्ची…...परिवार की गरीबी और कर्ज के बीच उसका सौदा। कागज पर ‘गोदनामा’ बताया। स्टांप पर बच्ची किसी दूसरे परिवार के हवाले हो गई। वह परिवार उसे कई साल अपने पास रखता है। फिर यही बच्ची राजस्थान-मध्यप्रदेश की सीमा से निकलकर मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहरों तक पहुंचती है। वहां उसका नाम, उम्र और पहचान तक बदल गए। आगे उसे बार में डांस या देह व्यापार के नेटवर्क में फंसा दिया। यही नहीं, जाे नाबालिग थी वे कागजाें में हेरफेर कर बालिग बन गई। यह किसी एक बच्ची की कहानी नहीं है बल्कि राजस्थान और मध्यप्रदेश की सीमा से जुड़े 16 जिलों की 100 से ज्यादा बस्तियों में अधिकांश घराें की है। करीब एक महीने की पड़ताल में भास्कर टीम ने इस नेटवर्क की कड़ियां तलाशीं। परिवारों से बातचीत, स्टांप पर बने गोदनामे, स्कूल रिकॉर्ड, एफआईआर, रेस्क्यू दस्तावेज के रिकॉर्ड को क्रॉस-वेरिफाई किया। इसके बाद टीम मुंबई पहुंची और वहां पुलिस रिकॉर्ड, बालिका गृह में जांच की। मुंबई में जांच के दौरान ऐसे मामलों के डॉक्यूमेंट्स और पुलिस रिकॉर्ड मिले। जिनमें राजस्थान और मध्यप्रदेश से लाई गई लड़कियों को बरामद किया गया था। भास्कर के पास इनके सभी दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। पहला सौदा : कर्ज था इसलिए देनी पड़ी बेटी हम 11 बस्तियों में पहुंचे। यहां गरीबी और कर्ज की मजबूरी में मां-बाप ही अपनी बेटियों को दूसरों के हवाले कर रहे हैं। पड़ताल के दौरान झालावाड़, बूंदी व मंदसौर की बस्तियों में चार परिवारों से मुलाकात हुई। रिपोर्टर : आपके कितने बच्चे हैं? मां-बाप : दो लड़के और तीन लड़कियां। रिपोर्टर : फिर बाकी बच्चियां कहां हैं? इस सवाल पर वे जवाब नहीं दे पाए। कुछ देर बाद बोले-एक मुंबई गई थी, जो आ गई। उनकी गोद में डेढ़ साल की एक मासूम बच्ची थी। हमने उनकी बड़ी बेटी माया (परिवर्तित नाम) के बारे में पूछा। रिपोर्टर : माया को क्यों दिया था? पिता : कर्ज में दलाल रोहित को दाे लाख में दे दिया। बूंदी शहर के पास एक गांव में मिली मां ने भी अपनी मजबूरी बताई। उसने अपनी दो बेटियां रिश्तेदारी में ही दे दी थीं। उधर, मध्यप्रदेश में मंदसौर के पास एक डेरे में मिली महिला ने बताया कि उसने अपनी तीन बेटियों को 50-50 हजार रुपए में दे दिया। दूसरा सौदा : गोदनामे-स्टांप पर खरीद-फरोख्त गरीब परिवारों में छोटी बच्चियां की गोद लेने के नाम पर स्टांप पर लिखापढ़ी और फिर बड़े शहरों में लाखों में सौदा। नेटवर्क खोजते हुए हम झालावाड़ की दो बस्तियों में पहुंचे। इनमें रिश्तेदार के पास ही बच्चियां पल रही थी। छोटी बच्चियां की गोद लेने के नाम पर स्टांप पर लिखापढ़ी और फिर बड़े शहरों में लाखों में सौदा। नेटवर्क खाेजते हुए हम झालावाड़ की दो बस्तियों में पहुंचे। इनमें रिश्तेदार के पास ही बच्चियां पल रही थी। रिपोर्टर : यह बच्ची आपकी क्या लगती है? परिवार : हमारी रिश्तेदार है। परिवार ने उसे रिश्तेदार बताया और टालमटाेल करने लगे। हकीकत में बच्ची का गाेदनामे का स्टांप लिखवाकर अपने पास रख लिया। बूंदी के एक गांव में पहुंचे। यहां बच्ची काे इसी जिले में भेजा लेकिन अब परिजन ढूंढ रहे लेकिन नहीं मिल रही। उसके भाई से बातचीत की ताे बताया कि अब उससे मिलने भी नहीं दे रहे। रिपोर्टर : आपकी बच्ची कहां है। परिजन : हमने बूंदी के ही 1 गांव में दी थी। वहां से नागपुर जाने की खबर है। अब वाे कहां है, पता नहीं है। रिपोर्टर : कितना समय हाे गया। परिजन : 4-5 साल हाे गए। मिलने भी नहीं दे रहे हैं। अब मेरी मां बीमार है। राखी पर भी नहीं भेजते हैं। तीसरा सौदा : धंधे के लिए 8 साल का एग्रीमेंट रिपोर्टर मुंबई के अंधेरी, परेल, बांद्रा, सेंट्रल मुंबई एरिया के कई बार में पहुंचे। वहां एक दलाल रविकिशन से संपर्क हुआ। दलाल से बातचीत हुई तो स्वीकार किया कि काम तो मिल जाएगा। रिपोर्टर: हमारे पास पांच लड़कियां हैं। अब उन्हें मुंबई लाना है। क्या काम मिल जाएगा? दलाल: पहले देखेंगे। काेई यहां आए हैं पहले आपके यहां से। रिपाेर्टर: हां, पहले आ चुकी है। अब आप ही कुछ काम बताओ। दलाल: पहले देखेंगे। समझ में आई ताे 8 साल का एग्रीमेंट करेंगे। अभी 25 से 30 लाख रुपए की रेट है। लेकिन उनकी उम्र क्या है। रिपोर्टर: पांच में से दो लड़कियां 15 और 17 साल की हैं। बाकी 20 साल की हैं। दलाल: दस्तावेज तो हम यहां के बनवा देंगे। नाम-पते सब बदल जाएंगे। हमारे लिए नया नहीं है। बातचीत में दलाल को रिपोर्टर पर शक हुआ तो उसने ज्यादा जानकारी नहीं दी और अपने बार में चला गया। मजबूरी - परिवार के लिए कमाने गई थी लेकिन वहां ताे गलत धंधे में फंसा दिया रानी (परिवर्तित नाम), उम्र 16 साल (20 लाख में सौदा) मौसी मुंबई ले गई, वहां जाकर फंस गई। मुझे लगा था कि वहां काम मिलेगा और जिंदगी बेहतर हो जाएगी लेकिन मुंबई पहुंचने के बाद हालात वैसे नहीं रहे, जैसे सोचा था। वहां बहुत तकलीफ हुई। गलत धंधे में डाल दिया। अब गांव आ गई हूं। गुड़िया (परिवर्तित नाम), उम्र 17 साल (23 लाख में सौदा) परिवारवालों ने पहले बूंदी भेजा। वहां से भुआ ने ग्वालियर के लिए कहा। लेकिन बाद में मुंबई भेज दिया। वहां परेशानी बढ़ गई। मुझे नहीं पता था कि आगे क्या होने वाला है। वहां तो हर दिन नई मुश्किल थी। मैं अपने घर लौटना चाहती थी, लेकिन आने नहीं दिया। साेनू (परिवर्तित नाम), उम्र 14 साल (9 लाख में सौदा) मां-बाप के लिए कमाना चाहती थी। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, सोचा वहां डांस बार में काम करेंगे लेकिन वहां तो और काम के लिए मजबूर किया। मैं चाहती थी कि कुछ कमाकर परिवार की मदद कर सकूं, इसी मजबूरी में मुंबई जाने के लिए तैयार हुई। मुंबई के बार में पुलिस आई तो तुरंत कैमरे बंद मुंबई के एक बार में टीम पहुंची तो 20 से ज्यादा लड़कियां थी। अचानक पुलिस आई तो सीसीटीवी कैमरे बंद कर सभी लड़कियों को अंदर भेज दिया। इसके बाद रिपोर्टर मुंबई के नैरूल पुलिस थाने में पहुंचे। वहां पता चला कि उम्र व पहचान बदलकर तीन बच्चियों को एग्रीमेंट पर बेचा। वे अभी देवनार बालिका गृह में हैं। वहां पहुंचे तो बताया कि 5 साल में एमपी, राजस्थान सहित अन्य राज्याें की 34 नाबालिग बेटियां निरुद्ध की है। ऐसे सबूत हैं जिनमें स्कूल में बालिका को नाबालिग से बालिग बना दिया। यहां खरीद-फरोख्त का नेटवर्क : राजस्थान के झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, राजसमंद, मध्यप्रदेश के मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा,राजगढ़, गुना, शिवपुरी, रतलाम और महू। …. ये इन्वेस्टिगेशन स्टोरी भी पढ़ें- मिठाई पर चांदी नहीं 'जहर':लैब टेस्ट में 99% वर्क नकली, चांदी में एल्युमिनियम और सोने में तांबा-जिंक; लिवर-किडनी खराब होने का खतरा राजस्थान में काजू कतली, बर्फी जैसी मिठाइयों पर लगने वाले चांदी और सोने के वर्क एल्युमिनियम और तांबे से तैयार हो रहे हैं। वहीं एल्युमिनियम जिसे खाने से लिवर-किडनी खराब हो सकती है…(CLICK कर पढ़ें)