सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की जोजरी, बांडी और लूनी नदियों में बढ़ते प्रदूषण और अवैध खनन को लेकर ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि करीब 20 लाख लोगों की जिंदगी खतरे में है। अब सिर्फ कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। जमीन पर असर दिखना चाहिए। जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सख्त आदेश पारित करते हुए यह निर्देश जारी किए। सुप्रीम कोर्ट ने नई फैक्टि्यों पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए। मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी। कोर्ट ने कहा- नदी को नाला बनने नहीं दिया जाएगा राज्य सरकार के जल संसाधन विभाग ने सीवेज के बहाव के आधार पर नदियों की चौड़ाई घटाने की कोशिश की थी। कोर्ट ने इसे गलत और भ्रामक बताया। कमेटी ने बताया कि बालोतरा में लूनी नदी की दर्ज चौड़ाई को घटाकर सिर्फ 8 मीटर करने की कोशिश हो रही थी। कोर्ट ने कहा- नदी को नाला नहीं बनने दिया जाएगा। नदियों की सीमा अब राजस्व विभाग और जल संसाधन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार ही मानी जाएगी। इसके दोनों तरफ 100 मीटर का अतिरिक्त सुरक्षा क्षेत्र होगा। वहीं 500 मीटर के दायरे में कोई भी रेड कैटेगरी उद्योग नहीं लगेगा। तीन दिन में एसआईटी बनाने के आ​देश अवैध बजरी खनन की जांच के लिए 3 दिन में एसआईटी बनाने का आदेश दिया गया है। एसआईटी का नेतृत्व आईजी रैंक के अधिकारी करेंगे। इसमें जोधपुर, बालोतरा और पाली के एसपी शामिल होंगे। एसआईटी यह जांच करेगी कि अवैध खनन के पीछे कौन लोग, नेटवर्क और फायदे उठाने वाले हैं। क्या इसमें सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत है। कोर्ट ने खान विभाग को फटकार लगाई। कोर्ट ने ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर विचार करने की बात कही। पांच खनन प्लॉट का भी जिक्र सुनवाई के दौरान कानाणा गांव पचपदरा (बालोतरा) में 458.6 हेक्टेयर में फैले 5 खनन प्लॉटों का भी जिक्र किया गया, जो करीब 8.1 किमी नदी तल को प्रभावित कर रहे हैं। बालोतरा ब्लॉक 1990 के दशक से ही डार्क जोन/ओवर-एक्सप्लॉइटेड घोषित है। कोर्ट ने केंद्रीय भूजल प्राधिकरण को मामले में पक्षकार बनाया है। सीजीडब्ल्यूए को जोधपुर, बालोतरा और पाली में भूजल की स्थिति पर हलफनामा देना होगा। राज्य सरकार को जेडएलडी प्लांट लगाने के लिए वित्तीय सहायता की नीति बनाने को कहा गया है। तब तक आवेदन पर केस-टू-केस आधार पर जल्द फैसला लिया जाए। जोधपुर के सांगरिया सीईटीपी पर शत-प्रतिशत का लक्ष्य रखा गया है। अवैध खनन की गुमनाम शिकायत के लिए सिस्टम बनाने का निर्देश दिया गया है, ताकि शिकायतकर्ता की पहचान गुप्त रहे और समय पर कार्रवाई हो। कोर्ट ने वरिष्ठ वकील बलवीर सिंह को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है।