दीपावली पर्व पर प्रदेश के सरकारी स्कूलों को स्वच्छ, सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने ‘विद्यालय सौंदर्यीकरण एवं दीपोत्सव 2026’ अभियान शुरू किया है। इसके तहत राजस्थान के सभी राजकीय विद्यालयों और कार्यालयों में साफ-सफाई, आवश्यक मरम्मत, रंग-रोगन और सौंदर्यीकरण के कार्य करवाए जाएंगे। अभियान गुरुवार से शुरू होकर दीपोत्सव तक चलेगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार ने इस संबंध में प्रदेश के सभी संयुक्त निदेशकों, स्कूल शिक्षा को निर्देश जारी कर निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरे करवाने को कहा है। अभियान का उद्देश्य विद्यालयों को स्वच्छ और आकर्षक बनाने के साथ विद्यार्थियों में अपने स्कूल के प्रति अपनत्व और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। 3 नवंबर तक पूरे करने होंगे काम विभागीय निर्देशों के अनुसार, 22 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 तक सभी राजकीय विद्यालयों में साफ-सफाई के कार्य पूरे करने होंगे। वहीं, 6 नवंबर से दीपोत्सव तक विद्यालयों में लाइटिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि दीपावली के अवसर पर स्कूल परिसर रोशनी से जगमगाएं। अभियान में शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों, ग्रामवासियों, स्काउट-गाइड, एनएसएस, एनसीसी और स्थानीय सामाजिक संगठनों का यथासंभव सहयोग लिया जाएगा। विद्यालय परिसर, खेल मैदान, कक्षा-कक्षों, शौचालयों और पेयजल स्थलों के आसपास विशेष रूप से सफाई करवाई जाएगी। विभाग का जोर है कि जनसहयोग और सामूहिक श्रमदान के माध्यम से विद्यालयों को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाया जाए, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण मिल सके। रंग-रोगन और मरम्मत भी होगी निर्देशों में विद्यालयों में अनुपयोगी फर्नीचर और दरी-पट्टी को नियमानुसार नष्ट करने या नीलाम करने की बात कही गई है। जरूरत के अनुसार मरम्मत और रंग-रोगन के कार्य जनसहयोग से करवाए जाएंगे। शौचालयों सहित अन्य आवश्यक स्थानों की मरम्मत के लिए समसा की कंपोजिट ग्रांट का नियमानुसार उपयोग किया जा सकेगा। शिक्षक संघ रेसटा ने किया अभियान का स्वागत शिक्षक संघ एलीमेंट्री सेकेंडरी टीचर एसोसिएशन (रेसटा) राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने अभियान का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ, सुंदर और सुव्यवस्थित विद्यालय विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच, अनुशासन और स्कूल के प्रति अपनत्व की भावना विकसित करते हैं। सलावद के अनुसार, सरकारी विद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना और विकास के प्रतीक भी हैं। ऐसे अभियानों से विद्यालयों के प्रति आमजन का जुड़ाव बढ़ेगा और जनसहयोग की भावना मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि सफाई और सौंदर्यीकरण के साथ विद्यार्थियों की सुरक्षा, स्वच्छ पेयजल और साफ-सुथरे शौचालयों पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। अभियान को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षकों पर अनावश्यक अतिरिक्त कार्यभार नहीं डाला जाना चाहिए। उन्होंने आवश्यक मरम्मत और अन्य कार्यों के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध करवाने तथा समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। वित्तीय नियमों की पालना अनिवार्य शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभियान के तहत सभी कार्य विभागीय नियमों, राजस्थान लोक उपापन पारदर्शिता अधिनियम-2012, इसके नियम-2013 तथा सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियमों के अनुरूप किए जाएंगे। अभियान के क्रियान्वयन के लिए संबंधित जिलों के एडीपीसी और बीआरसीएफ से समन्वय स्थापित किया जाएगा। विभाग का उद्देश्य जनभागीदारी और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग से सरकारी विद्यालयों को स्वच्छ, सुंदर और प्रेरणादायी बनाना है, ताकि विद्यार्थी अपने विद्यालय पर गर्व करें और उसके रखरखाव के प्रति जिम्मेदारी महसूस करें।