शेयर बाजार और IPO में मोटा मुनाफा कमाने का सपना दिखाकर साइबर ठगों ने चित्तौड़गढ़ जिले के शंभूपुरा थाना क्षेत्र के सावा गांव के 57 वर्षीय व्यक्ति से 13.50 लाख रुपए की ठगी कर ली। ठगों ने पहले उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर निवेश के लिए तैयार किया। फिर फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर लगातार बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाकर अलग-अलग चरणों में लाखों रुपए जमा करवाते रहे। जब पीड़ित ने अपनी रकम निकालनी चाही तो हर बार नए बहाने बनाकर और पैसे मांगने लगे। आखिर में जब करोड़ों का मुनाफा सिर्फ स्क्रीन पर दिखता रहा और एक भी बड़ी रकम वापस नहीं मिली तो उन्हें अपने साथ साइबर ठगी होने का पता चला। व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर बनाया भरोसा पीड़ित रमेशचंद्र सुखवाल ने पुलिस को बताया कि अप्रैल 2026 में मोबाइल पर व्हाट्सएप देखते समय उनकी नजर एक निवेश से जुड़े ग्रुप पर पड़ी। उन्हें यह भी नहीं पता कि उस ग्रुप में उन्हें कब और किसने जोड़ा था। ग्रुप में खुद को शेयर बाजार का विशेषज्ञ बताने वाले लोग भारतीय और अमेरिकी शेयर बाजार के साथ IPO में निवेश कर कुछ ही महीनों में 30 से 50 प्रतिशत या उससे अधिक मुनाफा कमाने के दावे कर रहे थे। ग्रुप में लगातार ऐसे संदेश और स्क्रीनशॉट भेजे जाते थे, जिनमें कई लोगों को अच्छा लाभ मिलने का दावा किया जाता था। इसके बाद एक लिंक भेजकर ऑनलाइन डिमैट अकाउंट खुलवाया गया और निवेश शुरू करने के लिए कहा गया। पहले 4.50 लाख, फिर 3.50 लाख और बाद में 5.50 लाख जमा करवाए रमेशचंद्र ने सबसे पहले 27 अप्रैल को अलग-अलग किस्तों में 1.50 लाख, 1 लाख और 1 लाख रुपए, यानी कुल 4.50 लाख रुपए जमा किए। कुछ ही समय बाद उनके खाते में करीब 5.25 लाख रुपए का मुनाफा दिखाया जाने लगा। इसके बाद ठगों ने एक नए IPO में निवेश का झांसा देकर 30 अप्रैल को 1-1 लाख रुपए की तीन किस्तों और 50 हजार रुपए, यानी कुल 3.50 लाख रुपए और जमा करवा लिए। प्लेटफॉर्म पर उनका बैलेंस बढ़कर करीब 9 लाख रुपए दिखने लगा। इसके बाद फिर नए IPO का हवाला देकर 1 मई को 1 लाख रुपए और 4 मई को 1.50 लाख रुपए जमा कराए गए। बाद में एक और IPO में निवेश के नाम पर 18 मई और 20 मई को 2-2 लाख रुपए जमा करवा लिए गए। इस तरह ठगों ने अलग-अलग चरणों में कुल 13.50 लाख रुपए अपने खातों में जमा करवा लिए। निकासी के समय शुरू हुआ बहानों का सिलसिला जब पीड़ित ने पहली बार अपने खाते से 1 लाख रुपए निकालने की कोशिश की तो प्लेटफॉर्म पर तकनीकी त्रुटि बताकर निकासी रोक दी गई। कंपनी की ओर से कहा गया कि उनका ट्रेड अभी पूरा नहीं हुआ है, इसलिए पैसा नहीं निकल सकता। बाद में भरोसा बनाए रखने के लिए केवल करीब 10 हजार रुपए की निकासी कराई गई। इसके बाद फिर उन्हें बड़े मुनाफे का लालच देकर निवेश बढ़ाने के लिए कहा जाता रहा। हर बार दावा किया जाता था कि अगला IPO पहले से ज्यादा फायदा देगा और अभी पैसा निकालना नुकसान का सौदा होगा। 1.10 करोड़ का मुनाफा दिखाया, फिर 35 लाख और मांगे बाद में कंपनी ने पीड़ित के डिमैट खाते में हजारों शेयर दिखाए, लेकिन बड़ी संख्या में शेयर लॉक कर दिए। कहा गया कि इन शेयरों को अनलॉक करने और पूरा मुनाफा लेने के लिए पहले करीब 35 लाख रुपए और जमा कराने होंगे। कंपनी के प्लेटफॉर्म पर आखिरी समय तक करीब 1.10 करोड़ रुपए का मुनाफा दिखाई देता रहा, लेकिन वास्तविक रकम निकालने का कोई रास्ता नहीं था। लगातार नई-नई शर्तें और अतिरिक्त पैसे मांगने पर पीड़ित को शक हुआ। उन्होंने ऑनलाइन जानकारी जुटाई तो पता चला कि यह पूरा निवेश प्लेटफॉर्म फर्जी है। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब साइबर ठगी के इस पूरे मामले की जांच कर रही है।